जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अध्यापक संवर्ग के शिक्षकों से जुड़े सेवा लाभ के मामले में अहम आदेश दिया है। आदेश के अनुसार शिक्षकों की सेवा अवधि की गणना उनकी पहली नियुक्ति की तारीख से किए जाने का मामला है, न कि केवल संविलियन की तारीख से। इससे शिक्षकों की वरिष्ठता और अन्य सेवा लाभों पर प्रभाव पड़ सकता है।
पहली नियुक्ति से सेवा की गणना और वेतन के पुनर्निर्धारण के आधार पर पात्र शिक्षकों को वेतन संबंधी लाभ मिल सकते हैं। विभिन्न रिपोर्टों में इससे शिक्षकों के मासिक वेतन में करीब 15 हजार से 20 हजार रुपये तक की संभावित बढ़ोतरी की बात कही गई है। हालांकि, वास्तविक लाभ प्रत्येक शिक्षक की सेवा अवधि, पद और वेतन निर्धारण के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।
इस फैसले से प्रदेश के करीब 70 हजार अध्यापक संवर्ग के शिक्षकों को लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। सेवा अवधि के पुनर्निर्धारण के बाद पात्र शिक्षकों के बकाया वेतन यानी एरियर की भी गणना की जा सकती है। एरियर की वास्तविक राशि संबंधित शिक्षक की सेवा अवधि और वेतन निर्धारण पर निर्भर करेगी।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित विभाग को आदेश के पालन तथा सेवा गणना को दुरुस्त करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। पहली नियुक्ति से सेवा अवधि जोड़ने का असर वरिष्ठता, क्रमोन्नति, समयमान वेतनमान, वेतनवृद्धि तथा पेंशन और ग्रेच्युटी जैसे अन्य सेवा संबंधी लाभों पर भी पड़ सकता है।
इस आदेश के लागू होने के बाद संबंधित शिक्षकों की सेवा अवधि और वेतन निर्धारण में संशोधन की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

