देवरी क्षेत्र के करीब 10 छात्रावासों की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल, रात्रिकालीन निरीक्षण की मांग | New India Times

त्रिवेंद्र जाट, देवरी/सागर (मप्र), NIT:

देवरी विधानसभा क्षेत्र के गौरझामर, केसली, सहजपुर और महाराजपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों में संचालित शासकीय बालक एवं कन्या छात्रावासों की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्र से सामने आ रही शिकायतों में छात्रावासों में अधीक्षकों की रात्रिकालीन मौजूदगी, विद्यार्थियों की सुरक्षा, भोजन की गुणवत्ता, सामग्री एवं बजट के उपयोग तथा विभागीय निगरानी व्यवस्था की जांच की मांग की जा रही है।

बताया जा रहा है कि गौरझामर में एक बालक एवं एक कन्या छात्रावास, केसली में करीब तीन बालक एवं तीन कन्या छात्रावास, सहजपुर में एक बालक छात्रावास तथा महाराजपुर में तीन छात्रावास संचालित हैं। इन छात्रावासों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी रहकर अध्ययन करते हैं। ऐसे में रात के समय जिम्मेदार अधीक्षक की मौजूदगी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवाल गंभीर माने जा रहे हैं।

रात्रि में अधीक्षकों की मौजूदगी पर सवाल

क्षेत्र में यह आरोप सामने आए हैं कि कुछ छात्रावासों में अधीक्षक रात्रि के समय परिसर में मौजूद नहीं रहते और घर से ही व्यवस्था संचालित करने की शिकायतें हैं। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविक स्थिति विभागीय रात्रिकालीन औचक निरीक्षण से ही स्पष्ट हो सकती है।

मध्यप्रदेश में छात्रावासों की व्यवस्था को लेकर अधिकारियों द्वारा अधीक्षकों को अपनी जिम्मेदारियों का पालन करने तथा छात्र-छात्राओं की सुरक्षा, भोजन, स्वच्छता और अन्य सुविधाओं पर निगरानी रखने के निर्देश दिए जाते रहे हैं। वहीं, छात्रावासों के निरीक्षण के दौरान विद्यार्थियों की सुरक्षा और उनकी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति की जांच पर भी जोर दिया जाता है।

ऐसे में देवरी क्षेत्र में इन निर्देशों का कितना पालन हो रहा है, यह जांच का विषय बन गया है।

एक अधीक्षक को एक से अधिक छात्रावासों का प्रभार, व्यवस्था पर सवाल

छात्रावासों की व्यवस्थाओं को लेकर सामने आ रही शिकायतों के बीच एक अधीक्षक को एक से अधिक छात्रावासों का प्रभार दिए जाने का मुद्दा भी चर्चा में है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब एक अधीक्षक के पास एक से अधिक छात्रावासों की जिम्मेदारी रहती है, तो प्रत्येक छात्रावास में पर्याप्त समय देना और वहां की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी करना मुश्किल हो जाता है।

आरोप है कि कुछ मामलों में अधीक्षक एक छात्रावास को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं, जबकि उन्हें दूसरे छात्रावास की भी जिम्मेदारी सौंप दी गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब किसी छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर पहले से शिकायतें या अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हों, तो उसी अधीक्षक को अतिरिक्त प्रभार देने का आधार क्या है?

शिकायतकर्ताओं का यह भी आरोप है कि एक छात्रावास की व्यवस्था संभालने में ही परेशानी होने के बावजूद दूसरे छात्रावास का अतिरिक्त प्रभार देने से दोनों स्थानों की व्यवस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं। उनका सवाल है कि आखिर विभागीय अधिकारी अतिरिक्त प्रभार देने के निर्णय की समीक्षा क्यों नहीं कर रहे हैं?

अतिरिक्त प्रभार के पीछे क्या है आधार?

सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि संबंधित अधीक्षकों को अतिरिक्त छात्रावासों का प्रभार किन परिस्थितियों और किस प्रशासनिक आधार पर दिया गया है। यदि किसी अधीक्षक के विरुद्ध छात्रावास संचालन, उपस्थिति, भोजन, सामग्री या अन्य व्यवस्थाओं को लेकर शिकायतें अधिकारियों के संज्ञान में हैं, तो ऐसे मामलों में अतिरिक्त प्रभार देने से पहले विभागीय स्तर पर समीक्षा की गई या नहीं, यह भी जांच का विषय है।

कुछ शिकायतकर्ताओं द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों और संबंधित अधीक्षकों के बीच कथित सांठगांठ की आशंका भी व्यक्त की जा रही है। हालांकि, इस प्रकार की किसी मिलीभगत की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए पूरे मामले में निष्पक्ष जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

क्षेत्रवासियों की मांग है कि पिछले एक वर्ष में जारी किए गए सभी अतिरिक्त प्रभार के आदेशों की जांच की जाए और यह देखा जाए कि किस अधीक्षक को कितने छात्रावासों का प्रभार दिया गया, संबंधित अधीक्षक ने प्रत्येक छात्रावास का कितनी बार निरीक्षण किया तथा उनके विरुद्ध पूर्व में कोई शिकायत या जांच लंबित थी या नहीं।

अधिकारियों की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल

छात्रावासों की व्यवस्थाओं को लेकर शिकायतें सामने आने के बाद अब सवाल उठ रहा है कि देवरी-केसली क्षेत्र के संबंधित अनुविभागीय अधिकारियों, जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इन छात्रावासों का नियमित और औचक निरीक्षण कितनी बार किया गया?

क्षेत्रवासियों की मांग है कि पिछले एक वर्ष में किए गए निरीक्षणों की जानकारी, निरीक्षण पंजिका में दर्ज कमियां तथा उन पर की गई कार्रवाई को सार्वजनिक किया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था की समीक्षा कब-कब की गई।

बजट और सामग्री की भी हो जांच

छात्रावासों में विद्यार्थियों के भोजन, सामग्री, रखरखाव तथा अन्य व्यवस्थाओं के लिए शासन द्वारा राशि उपलब्ध कराई जाती है। शिकायतों में इन मदों में अनियमितता के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।

इन आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए संबंधित छात्रावासों के बजट आवंटन, व्यय विवरण, बिल-वाउचर, स्टॉक रजिस्टर, भोजन व्यवस्था के रिकॉर्ड और सामग्री की भौतिक उपलब्धता का मिलान कराने की मांग की जा रही है।

यदि रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर पाया जाता है तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठ रही है।

भोजन और मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी जांच की मांग

छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को शासन के प्रावधानों के अनुसार भोजन, स्वच्छ पेयजल, बिजली, साफ-सफाई, बिस्तर, अध्ययन एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं मिलना जरूरी है।

इसके बावजूद यदि देवरी क्षेत्र के किसी छात्रावास में विद्यार्थियों को निर्धारित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं तो इसकी जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाना जरूरी है। विशेष रूप से भोजन की गुणवत्ता, निर्धारित मीनू का पालन, पेयजल, स्वच्छता और विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही सामग्री की मौके पर जांच किए जाने की मांग की जा रही है।

रात्रिकालीन औचक निरीक्षण की मांग

क्षेत्रवासियों का कहना है कि देवरी विधानसभा क्षेत्र के छात्रावासों का अचानक रात्रिकालीन निरीक्षण किया जाना चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि रात में अधीक्षक छात्रावास में मौजूद हैं या नहीं, बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था कैसी है और भोजन व अन्य सुविधाओं की वास्तविक स्थिति क्या है।

निरीक्षण की जानकारी पहले से संबंधित कर्मचारियों को दिए बिना जिला स्तर की टीम द्वारा अचानक जांच की जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आने की संभावना अधिक रहेगी।

बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?

सबसे बड़ा सवाल छात्रावासों में रहने वाले नाबालिग विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर है। यदि किसी छात्रावास में रात के समय जिम्मेदार अधीक्षक मौजूद नहीं रहता है तो आपात स्थिति में बच्चों की जिम्मेदारी कौन संभालेगा—यह सवाल अभिभावकों के लिए भी चिंता का विषय है।

इसी तरह, यदि एक अधीक्षक को एक से अधिक छात्रावासों का प्रभार दिया गया है तो यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि दोनों छात्रावासों में विद्यार्थियों की सुरक्षा और दैनिक व्यवस्थाओं की पर्याप्त निगरानी हो रही है।

क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि देवरी, केसली, गौरझामर, महाराजपुर और सहजपुर क्षेत्र के संबंधित छात्रावासों का जिला स्तर की टीम द्वारा औचक एवं रात्रिकालीन निरीक्षण कराया जाए। निरीक्षण में अधीक्षक की उपस्थिति, विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या, भोजन, साफ-सफाई, सुरक्षा, स्टॉक रजिस्टर, बजट और अन्य अभिलेखों की जांच की जाए।

अब कार्रवाई का इंतजार

छात्रावासों की व्यवस्थाओं को लेकर लगातार शिकायतें सामने आने के बाद अब निगाहें विभागीय अधिकारियों पर हैं। सवाल यह है कि यदि जांच में शासन के नियमों का उल्लंघन या वित्तीय अथवा प्रशासनिक अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों पर कब और क्या कार्रवाई की जाएगी।

साथ ही यह भी सवाल बना हुआ है कि यदि किसी अधीक्षक की कार्यप्रणाली को लेकर शिकायतें हैं तो उसे एक से अधिक छात्रावासों का अतिरिक्त प्रभार देने के पीछे विभागीय आधार क्या है?

क्षेत्रवासियों का कहना है कि छात्रावासों में रहने वाले बच्चे शासन और प्रशासन की जिम्मेदारी हैं। इसलिए किसी भी प्रकार की लापरवाही को केवल कागजी निरीक्षण तक सीमित न रखते हुए मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच की जानी चाहिए। यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए और यदि आरोप निराधार हैं तो विभागीय जांच के माध्यम से स्थिति भी स्पष्ट की जाए।

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