23 साल पुराने वादे की याद दिलाने 7 सितंबर को भोपाल पहुंचेंगे अस्थाई अंशकालीन कर्मचारी | New India Times

जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

प्रदेश के स्कूलों, छात्रावासों सहित विभिन्न विभागों में कार्यरत अस्थाई एवं अंशकालीन कर्मचारी न्यूनतम वेतन और स्थायीकरण की मांग को लेकर 7 सितंबर को भोपाल पहुंचेंगे। कर्मचारी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को वर्ष 2003 में किए गए वादे की याद दिलाएंगे। इस संबंध में संगठन की ओर से प्रदेश अध्यक्ष को पत्र भी लिखा गया है, जिसमें 23 वर्षों से चली आ रही कथित वादाखिलाफी का उल्लेख करते हुए न्यूनतम वेतन एवं स्थायीकरण की मांग की गई है। मांगें पूरी नहीं होने पर कर्मचारियों ने पं. दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा के समक्ष धरना देने की घोषणा की है।

अस्थाई, आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा की ओर से प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा, कार्याध्यक्ष डॉ. अमित सिंह, अंशकालीन कर्मचारी अध्यक्ष उमाशंकर पाठक, मनोज उईके, ग्राम पंचायत चौकीदार संघ के अध्यक्ष राजभान रावत एवं यशवंत गेदाम ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को पत्र भेजा है।

पत्र में कहा गया है कि वर्ष 2003 का विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी ने अस्थाई कर्मचारियों के मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए लड़ा था। तत्कालीन मुख्यमंत्री उमा भारती ने अस्थाई कर्मचारियों की मांगों के समर्थन में वल्लभ भवन के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना दिया था। प्रदेशभर में यात्राएं निकालकर उन्होंने अस्थाई कर्मचारियों को नियमित कर शासकीय सेवक का दर्जा देने का वादा किया था।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को लिखे पत्र में बताया गया है कि वर्ष 2003 में मुख्य रूप से तीन तरह के अस्थाई कर्मचारी थे—अंशकालीन कर्मचारी, मस्टर रोल श्रमिक और दैनिक वेतनभोगी। ये कर्मचारी तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के विभिन्न कार्यों में सेवाएं देते हुए शासन की व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।

स्कूलों और छात्रावासों में साफ-सफाई, भोजन बनाने तथा भृत्य के कार्य से लेकर पंचायतों में चौकीदारी और नल-जल योजनाओं के संचालन तक की जिम्मेदारी इन कर्मचारियों के पास थी। सुरक्षा श्रमिकों के रूप में जंगलों की देखरेख, ड्राइवर के रूप में मंत्रियों एवं अधिकारियों के वाहनों का संचालन तथा माली के रूप में बगीचों और उद्यानों की देखभाल जैसे कार्य भी इनके द्वारा किए जाते थे। अस्पतालों और नगरीय निकायों में भी बड़ी संख्या में अस्थाई कर्मचारी विभिन्न जिम्मेदारियां संभालते रहे हैं।

कर्मचारी नेताओं का आरोप है कि 23 वर्ष बाद वर्ष 2026 में भी इन कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। वर्ष 2003 में जिन अंशकालीन कर्मचारियों को करीब 3,000 रुपये मिलते थे, उन्हें आज भी कई स्थानों पर 4 से 5 हजार रुपये प्रतिमाह ही मिल रहे हैं। इसी तरह पंचायतों के चौकीदारों और नल-जल चालकों को वर्ष 2003 में करीब 2,000 रुपये मिलते थे, जबकि वर्तमान में भी कई कर्मचारियों को 2 से 3 हजार रुपये प्रतिमाह ही प्राप्त हो रहे हैं।

कर्मचारी नेताओं ने कहा कि विधानसभा चुनावों से पहले अस्थाई कर्मचारियों से विभिन्न वादे किए जाते रहे हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लाल परेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में अस्थाई कर्मचारियों के वेतन को दोगुना करने की घोषणा की थी। इसके बावजूद कर्मचारियों का कहना है कि 23 वर्षों में उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं हो सकी हैं।

कर्मचारी नेताओं के अनुसार, सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन 12,425 रुपये प्रतिमाह किए जाने की मांग को लेकर अंशकालीन कर्मचारी सोमवार, 7 सितंबर तथा ग्राम पंचायतों के कर्मचारी मंगलवार, 8 सितंबर 2026 को भोपाल पहुंचकर अपनी मांगें प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के समक्ष रखेंगे।

कर्मचारी नेताओं ने कहा कि बजट में सरकार ने प्रति व्यक्ति वार्षिक आय 1,62,000 रुपये होने का दावा किया है और प्रदेश की खुशहाली एवं विकास की तस्वीर पेश की गई है। ऐसे में सवाल है कि उन अस्थाई कर्मचारियों की स्थिति क्या है, जिन्हें महज 2, 3 या 5 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिल रहा है। बढ़ती महंगाई के दौर में इतने कम वेतन में परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल है।

इसी मुद्दे को लेकर स्कूलों, छात्रावासों एवं विभिन्न विभागों में कार्यरत अंशकालीन कर्मचारी, ग्राम पंचायतों के चौकीदार, नल-जल चालक, सफाईकर्मी, भृत्य एवं अन्य अस्थाई श्रमिक कर्मचारी 7 और 8 सितंबर को पं. दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा के समक्ष एकत्रित होकर अपनी मांगें रखेंगे।

कर्मचारी नेताओं ने कहा कि प्रदेश की मेहनतकश जनता वर्ष 2003 से लगातार भाजपा को समर्थन देती आ रही है। इसके बावजूद तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कई कार्यों में अस्थाई व्यवस्था कायम है, जहां कर्मचारियों को न तो रोजगार की स्थिरता मिल रही है और न ही जीवन-यापन के अनुरूप वेतन।

कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि अस्थाई कर्मचारियों की न्यूनतम वेतन एवं स्थायीकरण की मांग पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो भाजपा कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना एवं अनशन शुरू किया जा सकता है।

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