अतीश दीपंकर, ब्यूरो चीफ, पटना (बिहार), NIT:
बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा, आरएसएस और एनडीए के नेताओं पर तीखा हमला बोला है। रविवार को पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और चिराग पासवान के आरक्षण संबंधी बयानों को लेकर भी सवाल उठाए।
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि दोनों केंद्रीय मंत्री आरएसएस के निर्देश पर अलग-अलग तरह की बातें कर रहे हैं और इसके जरिए भाजपा-आरएसएस पर आरक्षण खत्म करने के कथित मूल उद्देश्य से लोगों का ध्यान भटकाने तथा आरक्षण समर्थक जनभावना का आकलन करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि जिनका अपना स्वतंत्र राजनीतिक वजूद नहीं होता, वे विचारधारा के नाम पर दूसरों के निर्देशन में ही राजनीति करते हैं। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि आरक्षित कोटे से चुनाव जीतकर मंत्री बने नेता संविधान और आरक्षण का विरोध करने वालों के साथ सत्ता का सुख भोग रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें आरक्षण से इतनी ही आपत्ति है तो उन्हें सामान्य सीट से चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक क्षमता साबित करनी चाहिए।
तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार, उपेंद्र कुशवाहा, चिराग पासवान और जीतन राम मांझी की पार्टियों की आरक्षण को लेकर स्पष्ट विचारधारा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि ये दल वास्तव में आरक्षण समर्थक हैं तो बिहार में महागठबंधन सरकार के दौरान बढ़ाई गई 65 प्रतिशत आरक्षण सीमा को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में पहल क्यों नहीं करते?
उन्होंने एनडीए नेताओं पर अवसरवादी और सुविधाभोगी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे नेता न तो आरक्षण की सीमा बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाते हैं और न ही विचारधारा की स्पष्ट राजनीति करते हैं। उनका आरोप था कि मंत्री पद, सुरक्षा और सरकारी सुविधाओं के लिए ये नेता किसी न किसी तरह सत्ता में बने रहना चाहते हैं।
तेजस्वी यादव ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के पुराने आरक्षण संबंधी बयानों का जिक्र करते हुए भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आरक्षण की समीक्षा की बात पर बिहार की जनता पहले भी अपना जवाब दे चुकी है और यदि भविष्य में ऐसी कोशिश हुई तो बिहार की जनता भाजपा और आरएसएस को करारा जवाब देगी।
आरक्षण के मुद्दे पर तेजस्वी यादव के ताजा बयान के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज होने के आसार हैं। अब नजर इस बात पर है कि भाजपा, आरएसएस और एनडीए के नेता तेजस्वी के आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। फिलहाल बिहार में आरक्षण को लेकर राजनीतिक बयानबाजी का दौर जारी है।

