सलेमपुर में विकास के दावों की खुली पोल ,जलभराव बदहाल सड़कें और जिम्मेदारों पर गंभीर सवाल | New India Times

वी.के. त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:

गोविंद नगर की तस्वीरें जिम्मेदारों से कई सीधे सवाल पूछ रही हैं,जब समस्या वर्षों पुरानी है तो समाधान अब तक क्यों नहीं।
विकास के दावों के बीच विकास खण्ड सदर की ग्राम पंचायत सलेमपुर के मोहल्ला गोविंद नगर कॉलोनी और अमर विहार मोहल्ले की तस्वीरें व्यवस्था की पोल खोलती नजर आ रही हैं।सड़कें बदहाल हैं,जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं है और गंदा पानी लोगों के घरों के मुख्य दरवाजों तक पहुंच रहा है। हालात ऐसे हैं कि मोहल्ले के लोगों का सामान्य जनजीवन तक प्रभावित हो रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या आज की नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी है।बारिश होते ही स्थिति और भयावह हो जाती है। सड़कों पर जलभराव के कारण लोगों का निकलना मुश्किल हो जाता है और घरों के सामने लंबे समय तक गंदा पानी जमा रहता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब समस्या वर्षों से मौजूद है, तो आखिर इसका स्थायी समाधान क्यों नहीं कराया गया।ग्रामीणों के मुताबिक, समस्या को लेकर कई बार शिकायतें की गईं।सीएम पोर्टल पर भी शिकायतें दर्ज कराई गईं लेकिन शिकायतों के बावजूद हालात जस के तस बने हुए है और कोई सुधार नहीं हुआ।सवाल उठता है कि अगर सरकारी शिकायत पोर्टल तक समस्या पहुंच चुकी है तो फिर जिम्मेदार विभाग और अधिकारी कार्रवाई के नाम पर क्या कर रहे हैं।ग्राम प्रधान और सचिव की जिम्मेदारी पर भी सवाल बने हुए है जहाँ ग्रामीणों की नाराजगी ग्राम प्रधान प्रशासक और ग्राम पंचायत सचिव पंकज श्रीवास्तव को लेकर भी सामने आ रही है।लोगों का आरोप है कि मोहल्ले की समस्या से जिम्मेदार लोग अनजान नहीं हैं फिर भी सड़क,नाली और जल निकासी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं कराया गया।

आखिर ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी क्या सिर्फ कागजों और बैठकों तक सीमित है
लोगों का आरोप है कि जब मोहल्ले में वर्षों से जलभराव की समस्या ग्रामीण झेल रहे हैं तो ग्राम प्रधान और सचिव ने अब तक इसके समाधान के लिए क्या कदम उठाए है।क्या समस्या के स्थायी समाधान के लिए कोई कार्ययोजना बनाई गई,अगर बनाई गई तो उसका परिणाम जमीन पर क्यों नहीं दिखाई दे रहा है।इन आरोपों पर ग्राम प्रधान और सचिव का पक्ष सामने आना भी जरूरी है।

जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल,सवाल केवल ग्राम पंचायत तक सीमित नहीं है।

सवाल उन सभी जनप्रतिनिधियों से भी है जिनके सामने ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं।विधायक हों सांसद हों या क्षेत्रीय स्तर के अन्य जनप्रतिनिधि अगर किसी मोहल्ले के लोग वर्षों से सड़क, नाली और जल निकासी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान हैं, तो फिर उनकी आवाज आखिर किसके दरवाजे तक पहुंचे,क्या जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी सिर्फ चुनाव के समय जनता के बीच पहुंचने तक सिमित है या वोट लेने तक सिमित है यह बड़ा सवाल बना हुआ है।जब जनता वोट देती है तो विकास का वादा किया जाता है। लेकिन जब वही जनता वर्षों बाद अपने घरों के सामने गंदे पानी में खड़ी होकर समस्या बता रही हो, तो उसकी सुनवाई क्यों नहीं हो रही।मकान बिकाऊ है लिखने की नौबत क्यों आई,इस पूरे मामले की सबसे गंभीर तस्वीर तब सामने आती है, जब बदहाल व्यवस्था से परेशान ग्रामीणों की ओर से मकान बिकाऊ है जैसे संदेश सामने आते हैं।सोचने वाली बात यह है कि आखिर वह कौन-सी मजबूरी है, जिसने लोगों को अपने ही घरों से परेशानी होने लगी है।जिस मकान को बनाने में परिवार की वर्षों की मेहनत और कमाई लगती है उसी मकान को बेचने की बात अगर बुनियादी सुविधाओं के अभाव में सामने आने लगे तो यह सिर्फ एक मोहल्ले की समस्या नहीं, बल्कि व्यवस्था की जवाबदेही पर गंभीर सवाल है।
ग्रामीणों का आरोप गंभीर है कि उनको स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बनी हुई रहती है और कोई उनके घर आना पसंद नहीं करता है,लंबे समय तक गंदा पानी जमा रहने और मच्छरों की समस्या के कारण ग्रामीणों में डेंगू, मलेरिया तथा अन्य गंभीर संक्रमणों को लेकर चिंता बनी हुई है।खासकर बच्चों और बुजुर्गों को लेकर परिवार परेशान हैं।हालांकि किसी बीमारी के फैलने की आधिकारिक पुष्टि स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही हो सकती है लेकिन जलभराव और गंदगी की स्थिति अपने आप में तत्काल सफाई और जल निकासी की मांग करती है।

क्या किसी बड़े हादसे या बीमारी के फैलने के बाद ही जागेगा प्रशासन।

ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल है कि क्या सलेमपुर के गोविंद नगर के लोगों को भी साफ सड़क,जल निकासी और सम्मानजनक जीवन का अधिकार नहीं है।ग्रामीणों को अब आश्वासन नहीं चाहिए उन्हें जमीन पर काम चाहिए।सड़क चाहिए,नाली चाहिए,जल निकासी चाहिए और वर्षों से चली आ रही इस समस्या का स्थायी समाधान चाहिए।गोविंद नगर की बदहाल तस्वीर अब सिर्फ ग्रामीणों की परेशानी नहीं बल्कि ग्राम पंचायत से लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों तक की जवाबदेही का सवाल बन चुकी है।अब देखना यह है कि जिम्मेदार इस तस्वीर को देखकर भी आंखें बंद रखते हैं या फिर सलेमपुर के गोविंद नगर में विकास जमीन पर दिखाई देता है।

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