राकेश यादव, ब्यूरो चीफ, सागर (मप्र), NIT:
सागर पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बेरोजगार लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी फर्में और म्यूल बैंक खाते खुलवाने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि दो आरोपी फरार हैं। आरोपियों के कब्जे से 2 करोड़ 69 लाख 42 हजार 700 रुपये नकद, करीब 30 लाख रुपये कीमत का सोना, नोट गिनने की मशीन और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं।

मामले का खुलासा मकरोनिया थाना क्षेत्र निवासी रोहित पटेल की शिकायत के बाद हुआ। रोहित ने पुलिस को बताया कि उसके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उसके नाम से ‘ग्लैमर इंटरप्राइजेस’ नाम की फर्जी फर्म बनाई गई और फेडरल बैंक में करंट अकाउंट खुलवाया गया। बैंक खाते की जांच में फरवरी 2026 से करीब छह माह की अवधि में लगभग 90 लाख रुपये के लेन-देन सामने आए। इसके बाद पुलिस ने बैंक खातों, फर्मों और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण शुरू किया।
जांच में पता चला कि गिरोह बेरोजगार लोगों को कमीशन और आसान कमाई का लालच देकर उनके दस्तावेज हासिल करता था। उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर फर्जी फर्में बनाकर निजी बैंकों में खाते खुलवाए जाते थे। इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन सट्टेबाजी और संदिग्ध रकम के लेन-देन के लिए किया जाता था।
पुलिस ने धर्मेन्द्र नाहर, सोनू दांगी, अमित विश्वकर्मा, विपिन गिरी, स्वर्णेन्द्र पांडे और रिषभ पटेल को गिरफ्तार किया है। वहीं सरमन उर्फ शुभम रैकवार और ऋषिकेशव सिंह फरार हैं। पुलिस के अनुसार, रिषभ पटेल ऑनलाइन बेटिंग का संचालन करता था। उसके कब्जे से बड़ी मात्रा में नकदी और सोना बरामद किया गया है।
जांच में अब तक 30 से अधिक फर्जी फर्मों का पता चला है। इनमें ग्लैमर इंटरप्राइजेस, भूपेन्द्र इंटरप्राइजेस, सूर्या इंटरप्राइजेस, समृद्धि टूर एंड ट्रेवल्स, कार्तिक इलेक्ट्रॉनिक्स, सागर ट्रेडर्स, महाकाल ट्रेडर्स और बालाजी ट्रेडर्स सहित अन्य फर्म शामिल हैं। इन फर्मों से जुड़े बैंक खातों के प्रारंभिक विश्लेषण में 5.50 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन सामने आए हैं।
पुलिस ने अमित विश्वकर्मा और रिषभ पटेल को आठ दिन की पुलिस रिमांड पर लिया है। पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों, फर्जी फर्मों और बैंक खातों की भूमिका की जांच कर रही है।

