मक़सूद अली, यवतमाल (महाराष्ट्र), NIT:

आदिम कोलाम समाज पर कथित रूप से बढ़ते अन्याय, अत्याचार और प्रशासनिक उपेक्षा के विरोध में शामा दादा कोलाम ब्रिगेड आक्रामक हो गई है। ब्रिगेड की प्रदेशाध्यक्ष इंदिरा बोंद्रे के निर्देश पर आयोजित पत्रकार परिषद में जिला प्रशासन को चेतावनी दी गई कि कोलाम समाज के साथ हो रहे अन्याय पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई तो पूरे जिले में तीव्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।
पत्रकार परिषद में आदिवासी युवा नेता अतुल आत्राम ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आश्रमशालाओं में आदिवासी एवं कोलाम समाज की छात्राओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आश्रमशालाओं और सरकारी छात्रावासों में छात्राओं के साथ होने वाली गंभीर घटनाओं के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होने से समाज में रोष बढ़ रहा है।
कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में मृत छात्राओं के परिजनों पर दबाव बनाकर मामूली आर्थिक सहायता देकर प्रकरणों को दबाने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी गंभीर घटनाओं के बाद जिम्मेदार लोगों पर कठोर कार्रवाई क्यों नहीं होती। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि अब कोलाम समाज की बेटियों की मौत के मामलों में केवल आश्वासन नहीं, बल्कि न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।
आजादी के दशकों बाद भी मूलभूत अधिकारों से वंचित
वनाधिकार कानून के अभ्यासक राहुल चिचघाटे ने कोलाम समाज की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वतंत्रता के इतने वर्षों बाद भी आदिम कोलाम समाज के अनेक परिवार अपने हक के घर, स्थायी रोजगार और कृषि भूमि से वंचित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी समाज के अंतिम व्यक्ति तक अपेक्षित रूप से नहीं पहुंच रहा है।
चिचघाटे ने वनाधिकार कानून में आवश्यक सुधार करने तथा जिले के पालकमंत्री और जनप्रतिनिधियों से कोलाम समाज की समस्याओं को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में उठाने की मांग की।
एकजुट होकर व्यापक आंदोलन का आह्वान
पत्रकार परिषद के माध्यम से कोलाम समाज के नागरिकों से आपसी मतभेद और भेदभाव भुलाकर एकजुट होने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने और समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए व्यापक संघर्ष खड़ा किया जाएगा।
इस अवसर पर शीतल बोंद्रे, अतुल आत्राम, राहुल चिचघाटे, गुरुदेव घोड़णारे, विष्णु सुरपाम सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे। वनाधिकार एवं आदिवासी अधिकारों के लिए कार्यरत तथा बिगर सातबारा शेतकरी संगठन के अध्यक्ष भाई जगदीश कुमार इंगले ने भी पत्रकार परिषद में आंदोलन को समर्थन दिया। उन्होंने अन्य सामाजिक संगठनों से भी इस आंदोलन में सहभागी होने का आह्वान किया।
प्रमुख मांगें: कोलाम समाज की छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, गंभीर घटनाओं की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए तथा समाज को वनाधिकार, आवास, रोजगार और अन्य शासकीय योजनाओं का प्रभावी लाभ दिलाया जाए।

