वसीयत में था बहू का नाम, फिर भी पति के नाम हुआ जमीन का नामांतरण; पटवारी पर मिलीभगत का आरोप | New India Times

मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

वसीयत में था बहू का नाम, फिर भी पति के नाम हुआ जमीन का नामांतरण; पटवारी पर मिलीभगत का आरोप | New India Times

ग्राम पंचायत दातला के ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में शिकायत प्रस्तुत कर बिना उचित जांच के वसीयत के आधार पर किए गए नामांतरण को निरस्त करने तथा संबंधित पटवारी सतभान कुशवाह के विरुद्ध जांच एवं कार्रवाई की मांग की है।शिकायतकर्ता ललिता काकोड़िया, पति प्रदीप काकोड़िया, निवासी ग्राम पंचायत दातला, वार्ड क्रमांक 01, तहसील जुन्नारदेव, जिला छिंदवाड़ा (म.प्र.) ने बताया कि उनके स्वर्गीय ससुर भैय्यालाल काकोड़िया की कृषि भूमि खसरा क्रमांक 161/1 एवं 164/2, रकबा 0.745 एवं 0.510 हेक्टेयर, ग्राम दातला, प.ह.नं. 71, राजस्व निरीक्षक मंडल जुन्नारदेव में स्थित है।

वसीयत में था बहू का नाम, फिर भी पति के नाम हुआ जमीन का नामांतरण; पटवारी पर मिलीभगत का आरोप | New India Times

शिकायतकर्ता ललिता काकोड़िया, पति प्रदीप काकोड़िया, निवासी ग्राम पंचायत दातला, वार्ड क्रमांक 01, तहसील जुन्नारदेव, जिला छिंदवाड़ा (म.प्र.) ने बताया कि उनके स्वर्गीय ससुर भैय्यालाल काकोड़िया की कृषि भूमि खसरा क्रमांक 161/1 एवं 164/2, रकबा 0.745 एवं 0.510 हेक्टेयर, ग्राम दातला, प.ह.नं. 71, राजस्व निरीक्षक मंडल जुन्नारदेव में स्थित है।

शिकायत के अनुसार, स्वर्गीय भैय्यालाल काकोड़िया ने अपने जीवनकाल में पूर्ण होशोहवास एवं स्वेच्छा से विधिवत वसीयत तैयार करवाई थी, जिसमें पांच व्यक्तियों के साथ ललिता काकोड़िया का नाम भी स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया था।

ललिता काकोड़िया ने शिकायत में बताया कि उनके पति प्रदीप काकोड़िया ने उन्हें लगभग 20 से 22 वर्ष पूर्व छोड़ दिया था और किसी दूसरी महिला के साथ ग्राम दातलावादी में निवास कर रहे हैं। पति द्वारा त्याग दिए जाने के बाद उनके दोनों बच्चों सहित उनका संपूर्ण पालन-पोषण, भरण-पोषण एवं देखभाल उनके स्वर्गीय ससुर भैय्यालाल काकोड़िया ने की। उन्होंने उन्हें अपनी पुत्रवधू तथा उनके बच्चों को अपना परिवार मानकर जीवनभर सहयोग दिया। इसी कारण उन्होंने अपने जीवनकाल में तैयार कराई गई वसीयत में उनका नाम दर्ज कराया, ताकि उनका और उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनके पति प्रदीप काकोड़िया ने राजस्व अधिकारियों, विशेषकर संबंधित पटवारी से मिलीभगत कर वास्तविक तथ्यों को छिपाते हुए कथित रूप से धोखाधड़ी एवं कूटरचित तरीके से अपने नाम पर अवैध नामांतरण करा लिया। जब उन्होंने संबंधित पटवारी के समक्ष वास्तविक वसीयत प्रस्तुत की, तो बिना उचित वैधानिक जांच के उसे स्वीकार नहीं किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि नामांतरण प्रकरण में उनके पति के पक्ष में कार्रवाई की गई, जिससे राजस्व अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

ललिता काकोड़िया ने यह भी आरोप लगाया कि उनके पति द्वारा उन्हें एवं उनके दोनों बच्चों को घर से निकालने, कृषि भूमि पर कार्य करने से रोकने तथा मानसिक, सामाजिक एवं आर्थिक रूप से प्रताड़ित करने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। इससे उनके और उनके बच्चों के भरण-पोषण एवं जीवनयापन का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।

शिकायतकर्ता ने कहा कि यदि स्वर्गीय भैय्यालाल काकोड़िया की अंतिम इच्छा एवं वैध वसीयत की अनदेखी कर कथित अवैध नामांतरण को कायम रखा जाता है, तो यह उनके वैधानिक अधिकारों का हनन होगा।

उन्होंने जिला कलेक्टर से मांग की है कि कथित धोखाधड़ी एवं कूटरचित तरीके से किए गए नामांतरण को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। स्वर्गीय भैय्यालाल काकोड़िया द्वारा तैयार की गई वैध वसीयत के आधार पर उनका नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज किया जाए।

इसके साथ ही संबंधित पटवारी सतभान कुशवाह एवं अन्य दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कर उनके विरुद्ध कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए। प्रकरण के अंतिम निराकरण तक संबंधित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश जारी किए जाएं।

शिकायतकर्ता ने अपने एवं अपने दोनों बच्चों के वैधानिक अधिकारों की रक्षा, सुरक्षा एवं न्याय प्रदान करने की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी, कूटरचना अथवा मिलीभगत प्रमाणित होती है, तो दोषियों के विरुद्ध प्रचलित कानूनों के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

शिकायतकर्ता ने जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा नियमानुसार उचित वैधानिक कार्रवाई की जाए।

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