मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

जुन्नारदेव जनपद मुख्यालय से लगी ग्राम पंचायत दातलावादी से कृषि भूमि के नामांतरण को लेकर एक और गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत दातलावादी वार्ड क्रमांक 1 माता दफाई निवासी ललिता काकोड़िया ने एसडीएम एवं वरिष्ठ राजस्व अधिकारियों को लिखित शिकायत सौंपकर आरोप लगाया है कि उनके स्वर्गीय ससुर की कृषि भूमि का नामांतरण फर्जी दस्तावेजों,धोखाधड़ी और राजस्व अधिकारियों की कथित मिलीभगत से उनके पति के पक्ष में करा दिया गया, जबकि स्वर्गीय ससुर द्वारा तैयार की गई वैध वसीयत में उनका नाम स्पष्ट रूप से दर्ज है। शिकायत के अनुसार, स्वर्गीय भैय्यालाल ककोड़िया की कृषि भूमि खसरा क्रमांक 161/1 एवं 164/2, कुल रकबा 1.215 हेक्टेयर, ग्राम दातलावादी में स्थित है।ललिता काकोड़िया का कहना है कि उनके ससुर ने अपने जीवनकाल में पूरी स्वेच्छा एवं विधिसम्मत तरीके से वसीयत तैयार करवाई थी, जिसमें पांच अन्य व्यक्तियों के साथ उनका नाम भी शामिल किया गया था,ताकि भविष्य में उन्हें और उनके बच्चों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
पति ने वर्षों पहले छोड़ दिया, ससुर ने दिया सहारा
आवेदन में ललिता काकोड़िया ने उल्लेख किया है कि उनके पति प्रदीप काकोड़िया लगभग 20 से 22 वर्ष पूर्व उन्हें छोड़कर दूसरी महिला के साथ रहने लगे। इसके बाद उनके तथा दोनों बच्चों का पालन-पोषण, शिक्षा और देखभाल स्वर्गीय भैय्यालाल काकोड़िया ने ही की। इसी कारण उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा के रूप में वसीयत में पुत्रवधू का नाम दर्ज कराया था।
पटवारी पर पक्षपात और मिलीभगत का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि पति प्रदीप काकोड़िया ने संबंधित पटवारी एवं अन्य राजस्व अधिकारियों से मिलीभगत कर वास्तविक तथ्यों को छिपाते हुए अपने नाम पर अवैध नामांतरण करा लिया। जब उन्होंने संबंधित पटवारी के समक्ष मूल वसीयत प्रस्तुत की तो बिना किसी विधिक जांच के उसे फर्जी बताकर अस्वीकार कर दिया गया, जबकि दूसरी ओर उनके पति के पक्ष में नामांतरण की कार्रवाई कर दी गई। इससे राजस्व प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मानसिक, सामाजिक और आर्थिक प्रताड़ना का भी आरोप
ललिता काकोड़िया ने यह भी आरोप लगाया है कि उनके पति उन्हें और उनके दोनों बच्चों को कृषि भूमि पर काम नहीं करने दे रहे हैं तथा घर से निकालने, मानसिक प्रताड़ना देने और आर्थिक रूप से परेशान करने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। इससे उनके परिवार के सामने आजीविका का संकट उत्पन्न हो गया है।
प्रशासन की जांच पर टिकी निगाहें
मामला सामने आने के बाद अब पूरे क्षेत्र की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच में सत्यता सामने आती है तो यह राजस्व व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मामला साबित हो सकता है। वहीं, प्रशासन का पक्ष और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

