नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

2014 में सैकड़ों करोड़ की रिश्वत ऑफर होने का बयान देने वाले पूर्ण कालीन संपूर्ण इरिगेशन मंत्री गिरीश महाजन को मोदी सरकार ने इसी मंत्रालय में आज इरिगेशन विभाग का अपूर्ण मंत्री बनाकर बिठाया है। इरिगेशन मंत्रालय ने बीते 12 साल में लाखों लोगों को अमीर बनाया है। जलगांव के तापी पटबंधारे विकास निगम और PWD ने मिलकर वाघूर डैम में बनाए द्वीप के निर्माण में करोड़ों रूपये का गबन किया गया है।

PWD के मुख्य इंजीनियर प्रशांत सोनवाने और गिरीश सूर्यवंशी तबादलो के बाद भी हटाए नहीं जा रहे हैं। PWD में चल रहे भ्रष्टाचार को लेकर समाजसेवी शिवराम पाटिल मगर के सैकड़ों वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वाघूर डैम में बने बैकवुड्स एमराल्ड का टेंडर लेने वाला ठेकेदार और अन्य तत्व ग़ायब हैं। देवेन्द्र फड़नवीस के हाथों इस प्रोजेक्ट का कथित लोकार्पण किसी रहस्य से कम नहीं है। इस द्वीप पर पहुंच पाना आम आदमी के लिए आर्थिक रूप से मुश्किल कर दिया गया है। खोजी पत्रकारों को टापू पर जाना है तो तैरकर जाना पड़ेगा।
2016 में इसी टापू पर गिरीश महाजन द्वारा वन औषधि केंद्र बनाया जाना था केंद्र सरकार की ओर से चार अफ़सर आए रिपोर्ट रिकार्ड की गई लेकिन तापी पटबंधारे के अधिकारियों ने यहां जल पर्यटन केंद्र बना दिया। पाठकों से निवेदन है कि इस वाटर टूरिस्ट टापू को जेफ्री एप्स्टाइन के केस से जोड़कर कोई अभद्र कल्पना न करें। सूत्रों के मुताबिक टापू का सच जानने के लिए PWD में सूचना अधिकार तहत आवेदन दायर किए गए हैं जिसके जवाब में आवेदनों को यह कहकर ख़ारिज कर दिया गया कि प्रोजेक्ट सूचना अधिकार के अधीन नहीं आता है। महाराष्ट्र में देवेन्द्र फड़नवीस सरकार के भ्रष्टाचार की खबरों से जनता में प्रचंड असंतोष है। वाटर रिसॉर्ट में किए गए कथित भ्रष्टाचार की जांच के लिए कोर्ट में अर्जी लगाने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।

