वी.के. त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:

पुलवामा आतंकी हमले में बलिदान हुए वीर शहीदों की स्मृति में दिनांक 14 फरवरी 2026, शनिवार को महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय के माननीय कुलगुरु प्रो. प्रमोद कुमार वर्मा जी के संरक्षण में “भारतीय सेना के प्रति युवाओं में जागरूकता” विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई।
इस अवसर पर दो सत्र संचालित किया गया। प्रथम सत्र भारतमाता की पूजार्चना से हुआ, तत्पश्चात् शहीद मंगल पांडेय जी को स्मारक पर माल्यार्पण कर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई एवं द्वितीय सत्र में भारतीय सेना के प्रति युवाओं में जागरूकता विषय पर व्याख्यान संगोष्ठी हुई। प्रथम सत्र में डॉ. के.के. त्रिपाठी (विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी) के सुझावानुसार यह कार्यक्रम मध्याह्न में पेंडरई ग्राम स्थित मंगल पांडेय स्मारक के समीप सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारम्भ भारतमाता की पूजार्चना से हुआ, तत्पश्चात् शहीद मंगल पांडेय जी को माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित सभी गणमान्यजनों ने पुलवामा हमले सहित राष्ट्र की रक्षा में बलिदान देने वाले समस्त वीर जवानों को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए दो मिनट का मौन रखकर उन्हें नमन किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता योग विभागाध्यक्ष डॉ. नित्येश्वर चतुर्वेदी महोदय ने की। ग्राम पेंडरई के सरपंच श्री अखिल दुबे विशेष अतिथि रहे तथा स्मारक निर्माता महर्षि वेद विज्ञान विद्यापीठ, करौंदी के आचार्य श्री ललित गौतम मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के संयोजक डॉ आलोक चन्द्र परिडा जी ने उद्देश्य कथन में कहा – राष्ट्र रक्षा के समान कोई पुण्य नहीं, न ही कोई व्रत या यज्ञ है। अतः राष्ट्र रक्षा ही सर्वोपरि है। तत्पश्चात् अपने उद्बोधन में वक्ताओं ने शहीदों के अदम्य साहस, राष्ट्रनिष्ठा एवं त्याग को युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए राष्ट्रसेवा के संकल्प को सुदृढ़ करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर प्रकाश गर्ग (पेंडरई) एवं सविता बाजपेई (महनेर) नामक भिन्न भिन्न स्थान के शहीद परिवारों के सदस्यों का माल्यार्पण एवं अंगवस्त्र से सम्मान किया गया।
इस गरिमामयी अवसर पर पेंडरई ग्राम तथा समीपस्थ डॉ सुनील गर्ग, श्री सुदर्शन मिश्र, श्री सौरभ मिश्र प्रभृति गणमान्यजन उपस्थित रहे एवं विश्वविद्यालय के डॉ. नवीन चौबे, श्री अशोक सिंह, डॉ. खुशेन्द्र चतुर्वेदी, डॉ. चन्द्रशेखर मिश्र, डॉ. अंकित राठौर, श्री हरिनारायण शर्मा, श्री धनीराम त्रिपाठी, श्री स्वतन्त्र द्विवेदी, श्री किशोर महलोनिया, श्रीमती माधुरी गर्ग, श्रीमती रंजिता परौहा सहित छात्र-छात्राओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान एवं शहीदों के आदर्शों को आत्मसात् करने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
राष्ट्रीय संगोष्ठी के द्वितीय सत्र में समय 2:00 बजे से स्थान आभासीय जूम पटल के माध्यम से महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय के वेद विभाग एवं ग्लोबल संस्कृत फोरम,मध्यप्रदेश प्रान्त के संयुक्त तत्वावधान में “भारतीय सेना के प्रति युवाओं में जागरूकता” विषय पर माननीय कुलगुरु प्रो. प्रमोद कुमार वर्मा के संरक्षण में प्रो.मानवेन्द्रपाण्डेयमहोदय के कुशलमार्गदर्शनेन से एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया।
डॉ चन्द्रशेखर मिश्र महोदय द्वारा मंगलाचरण से व्याख्यान कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। डॉ. खुशेन्द्र देव चतुर्वेदी महोदयने अतिथियों का परिचय एवं स्वागत किया।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. आलोक चन्द्र परिडा (वेद-विभागाध्यक्ष) नेकार्यक्रम का उद्देश्य वेदोपनिषदोक्त अनेकों उदाहरणों से स्पष्ट किया। राष्ट्ररक्षा को स्वधर्म (कर्तव्य) कहते हुए उन्होंने कहा “स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः” (श्रीमद्भगवद्गीता 3.35) जिसका अर्थ है- अपने कर्तव्य (स्वधर्म) का पालन करते हुए मृत्यु प्राप्त करना भी श्रेष्ठ है, लेकिन दूसरे का कर्तव्य (पर धर्म) अपनाना विनाशकारी है।
अतः हम सभी को राष्ट्ररक्षा हेतु वीर शहीदों के आत्माहुति के स्मरण में सदैव कर्तव्यपरायण होकर स्वधर्म एवं स्वकर्म यज्ञ में “राष्ट्राय स्वाहा, इदं राष्ट्राय, इदं न मम” अर्थात् यह सब राष्ट्र के लिए है, मेरे लिए नहीं ऐसी आहुतियां प्रदान करनी चाहिए, जिससे हमारी प्रार्थना से “वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः” (यजुर्वेद 9.23) जिसका अर्थ है, “हम राष्ट्र के पुरोहित/सजग चिंतक बनकर राष्ट्र को सदैव जागृत और जीवंत बनाए रख पायेंगे।
तत्पश्चात् कार्यक्रम के मुख्यवक्ता श्री जे. वी. पाण्डेय ने भारतीय सेना के गौरवशाली इतिहास, वर्तमान चुनौतियों तथा युवाओं के लिए उपलब्ध करियर अवसरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने सेना की आपदा प्रबंधन एवं राष्ट्रीय संकट के समय निभाई जाने वाली महत्वपूर्ण भूमिका का भी उल्लेख किया।
विशिष्ट वक्ताओं में धर्मगुरू श्री संजय रथ ने राष्ट्रसेवा को सर्वोच्च धर्म बताते हुए युवाओं को आत्मबल एवं चरित्र निर्माण की प्रेरणा दी एवं प्रार्थना को दैवीय शक्ति बताते हुए कहा कि हमारी सत्प्रार्थना राष्ट्र रक्षा में सन्नद्ध सेना को शक्तिशाली बनाती है एवं पारिवारिक समस्याओं से मुक्त करने में मदद करती है।
तदुपरान्त प्रवक्ता धर्मगुरू श्री जलज शर्मा ने वैदिक परंपरा में राष्ट्ररक्षा की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” इति श्रीराम जी प्रोक्त सन्दर्भ को बताते हुए राष्ट्ररक्षा को सर्वोपरि बताते हुए भारतीय सेना के आदर्शों को धर्म और कर्तव्य से जोड़ा।
कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. राजेश कुमार मिश्र (ग्लोबल संस्कृत फोरम) तथा संयोजक डॉ. आलोक चन्द्र परिडा (वेद विभागाध्यक्ष) के कुशल निर्देशन में संगोष्ठी सुव्यवस्थित रूप से सम्पन्न हुई। सह-संयोजक आचार्य डॉ. चन्द्रशेखर मिश्र, डॉ. नेहा मिश्रा, श्री हरिनारायण शर्मा एवं श्री धनीराम त्रिपाठी का विशेष योगदान रहा।
संगोष्ठी में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्षों,प्राध्यापकों,शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम के अंत में सम्मिलित सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। इस संगोष्ठी में भारत के भिन्न भिन्न राज्यों से प्रायशः 100 से अधिक प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। यह संगोष्ठी युवाओं में राष्ट्रभक्ति एवं भारतीय सेना के प्रति सम्मान की भावना जागृत करने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुई।

