अशफ़ाक़ क़ायमखानी, सीकर/जयपुर (राजस्थान), NIT:

राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनू जिलों तथा इनके आसपास के सत्यावनी क्षेत्र में परंपरागत रूप से रहने वाली कायममखानी बिरादरी मूल रूप से कृषि, पुलिस और सेना सेवा को प्राथमिकता देती आई है। लेकिन पिछले चार दशकों से उन्होंने अपने पारंपरिक कार्यों से धीरे-धीरे दूरी बनाते हुए विशेष रूप से अरब देशों में मजदूरी करने की ओर रुझान बढ़ाया है, जिससे शिक्षा की ओर झुकाव कम हुआ। साथ ही वाणिज्यिक ज्ञान के अभाव में मजदूरी से कमाए गए धन का व्यवस्थित उपयोग नहीं हो पाया।
हालांकि, पिछले एक दशक से कायममखानी बिरादरी की महिलाएं विशेष रूप से अपनी बिरादरी में उपयोग होने वाले महिला वस्त्रों का व्यापार बहुत अच्छे तरीके से कर रही हैं।
कायममखानी बिरादरी में शादी, चूचक, भात और अन्य खुशी के अवसरों के अलावा बहन-बेटी सहित रिश्तेदारों के आने-जाने पर महिलाओं को वस्त्र देने का चलन दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।
पहले ये वस्त्र बाजारों से खरीदे जाते थे, लेकिन पिछले एक दशक से शुरुआत में कुछ गांवों की महिलाओं ने घर से ही इन वस्त्रों का व्यापार शुरू किया। अब यह व्यापार हर गांव तक तेजी से फैल रहा है। कई गांवों में एक-दो नहीं बल्कि अनेक महिलाएं इस व्यापार से जुड़ चुकी हैं। विशेष बात यह है कि सभी महिलाएं अपने-अपने घरों से ही यह व्यापार करती हैं।
व्यापार करने वाली महिलाएं भी महिलाएं हैं और ग्राहक भी महिलाएं ही होती हैं। जानकारी के अनुसार महिलाएं सुजानगढ़, लाडनू, झुंझुनू, जयपुर और अजमेर के अलावा सूरत से भी वस्त्रों की खरीद करती हैं। कुछ महिलाएं छोटे और बड़े स्तर पर व्यापार करने वाली महिलाओं से भी वस्त्र खरीदती हैं।
इस व्यापार से जुड़ी महिलाओं का मासिक टर्नओवर 30–40 हजार रुपये से लेकर लाखों रुपये तक होता है।
कुल मिलाकर अब अनेक गांवों में महिलाओं के साथ उनके बेटे-बेटियां और पति भी इस व्यापार में सहयोग करने लगे हैं।
इससे महिलाओं की व्यावसायिक समझ बढ़ रही है और कुछ महिलाएं अपने व बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी निकाल रही हैं। कई महिलाएं अच्छा-खासा व्यापार कर रही हैं। महिलाओं की इस व्यापारिक समझ को और आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

