स्कूल शिक्षा विभाग की खरीद प्रक्रियाओं में कार्टेल एवं भ्रष्टाचार का आरोप, कांग्रेस ने DPI से की उच्च स्तरीय जांच की मांग | New India Times

अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:


कांग्रेस के प्रदेश सचिव राजकुमार सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) को ज्ञापन सौंपकर स्कूल शिक्षा विभाग में इंटरएक्टिव पैनल सहित विभिन्न खरीद प्रक्रियाओं में कार्टेल आधारित, योजनाबद्ध एवं संगठित भ्रष्टाचार की जांच कराए जाने की मांग की है।

प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस नेता जितेन्द्र मिश्रा, संतोष सिंह परिहार, प्रशांत गुरूदेव और राहुल बबेले शामिल रहे। ज्ञापन के माध्यम से DPI के अंतर्गत की गई खरीद प्रक्रियाओं में गंभीर अनियमितताओं की ओर ध्यान आकृष्ट कराया गया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया में कार्टेल बनाकर पूर्व-निर्धारित कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया, कम दरों की जानबूझकर अनदेखी की गई और मूल्यांकन में पक्षपात किया गया, जिससे शासन को भारी आर्थिक क्षति हुई है।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि इंटरएक्टिव पैनल सप्लाई से जुड़े टेंडरों में ऐसी शर्तें रखी गईं, जिनसे खुली प्रतिस्पर्धा समाप्त हो गई। उपलब्ध दस्तावेजों से स्पष्ट है कि टेंडर प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी और चयन पहले से तय कंपनियों के पक्ष में किया गया। बाजार और पोर्टल पर कम दरों पर उपलब्ध सामग्री को नजरअंदाज कर अधिक दरों पर खरीद की गई।

स्कूल शिक्षा विभाग की खरीद प्रक्रियाओं में कार्टेल एवं भ्रष्टाचार का आरोप, कांग्रेस ने DPI से की उच्च स्तरीय जांच की मांग | New India Times

प्रतिनिधिमंडल ने कंपनियों के मूल्यांकन में भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि LG और Samsung जैसी कंपनियों को योग्य घोषित किया गया, जबकि ACER को अयोग्य ठहराया गया, जो न तो नियमसम्मत था और न ही तार्किक। कांग्रेस का कहना है कि इसका उद्देश्य प्रतिस्पर्धा को खत्म करना था।
कांग्रेस ने अन्य राज्यों से तुलना करते हुए कहा कि असम जैसे राज्यों में वही इंटरएक्टिव पैनल कम कीमत, बेहतर वारंटी और स्पष्ट स्पेसिफिकेशन के साथ खरीदे गए, जबकि मध्यप्रदेश में अधिक कीमत पर खरीद की गई। जिला स्तर पर जहां इंटरएक्टिव पैनल 90 हजार से 1 लाख रुपये प्रति यूनिट में खरीदे गए, वहीं राज्य स्तर पर सामूहिक खरीद में कीमत 1.14 लाख रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच गई, जो न्यायसंगत नहीं है।

कांग्रेसी नेताओं ने आरोप लगाया कि एल-1 आधारित पारदर्शी प्रणाली को खत्म कर 60-40, 50-30-20 और 50-50 जैसे “कार्टेल मॉडल” अपनाए गए, जिनमें पहले से 2-3 कंपनियों का चयन कर कार्य आपस में बांट दिया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि उपलब्ध सूचनाओं के अनुसार आगामी समय में 800 से 1000 करोड़ रुपये तक के कार्यों की बुकिंग पहले ही कर ली गई है।

कांग्रेस ने DPI से मांग की है कि इंटरएक्टिव पैनल सहित सभी संबंधित टेंडरों की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, संबंधित मंत्री, ओएसडी, विभागीय अधिकारी, टेंडर समिति के सदस्य, निजी दलाल और कंपनियों के कार्टेल की भूमिका की जांच हो। साथ ही सभी खरीद प्रक्रियाओं को पुनः एल-1 आधारित खुली प्रतिस्पर्धा प्रणाली में लाया जाए और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि कार्रवाई नहीं होने पर पार्टी बड़ा कदम उठाने को विवश होगी।

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