रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग की गतिविधियां बच्चों और महिलाओं के पोषण, स्वास्थ्य, सर्वांगीण विकास और महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि विभाग की सभी योजनाओं और कार्यक्रमों का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पारदर्शी एवं सुगम तरीके से पहुंचाया जाए। कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन और मॉनिटरिंग में आईटी का अधिकतम उपयोग किया जाए।
मुख्यमंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि बच्चों और महिलाओं के पोषण व स्वास्थ्य के लिए स्कूल शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करें। वहीं महिलाओं की आत्मनिर्भरता एवं सशक्तिकरण के लिए कौशल उन्नयन, रोजगार एवं तकनीकी शिक्षा विभागों के साथ प्रभावी सहयोग सुनिश्चित किया जाए।
मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक में महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई और विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में विभाग की दो वर्षों की उपलब्धियों एवं नवाचारों का प्रेज़ेंटेशन दिया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लाड़ली लक्ष्मी योजना प्रदेश की बेटियों के उज्ज्वल भविष्य से जुड़ी अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है। उन्होंने निर्देश दिया कि किसी भी चरण पर लाड़ली लक्ष्मी योजना की हितग्राही बालिकाओं का ड्रॉप आउट न हो। यदि कोई ड्रॉप आउट होता है तो त्वरित कारणों का निराकरण कर उन्हें योजना में पुनः जोड़ा जाए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि महिलाओं और बच्चों से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हमारा लक्ष्य पारदर्शिता, समयबद्धता और लाभार्थी-केंद्रित व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाना है।
उन्होंने जिला स्तर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से समन्वय स्थापित कर आंगनवाड़ी केंद्रों की बाउंड्री वॉल निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।
बैठक में मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने बताया कि पीएम जनमन योजना अंतर्गत भवन डिज़ाइन एवं ऑनलाइन मॉनिटरिंग मॉड्यूल को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। मध्यप्रदेश को योजना में सर्वाधिक 704 आंगनवाड़ी भवनों की स्वीकृति मिली है, जिनमें निर्माण प्रगति देश में सर्वोच्च है।
उन्होंने बताया कि कुपोषण निवारण में झाबुआ जिले के “मोटी आई” नवाचार को प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
दो वर्षों की प्रमुख उपलब्धियां (संक्षेप में):
• आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की पूर्णतया ऑनलाइन पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया लागू करके मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बना।
• टेक होम राशन की FRS प्रक्रिया में मध्यप्रदेश प्रथम रहा।
• स्पॉन्सरशिप योजना में 20,243 बच्चों को लाभ — प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर रहा।
• भवन निर्माण की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए अत्याधुनिक मॉड्यूल विकसित किया गया।
• 20 मीटर जियो-फेंसिंग आधारित उपस्थिति प्रणाली ने डिजिटल पारदर्शिता को बढ़ावा दिया।
• प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में 9.70 लाख गर्भवती महिलाओं को 512 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी गई।
• लाड़ली बहना योजना में जनवरी 2024 से नवंबर 2025 तक 36,778 करोड़ रुपये का भुगतान।
• महिला हेल्पलाइन द्वारा 1,72,000 महिलाओं को सहायता।
• वन स्टॉप सेंटर द्वारा 52,095 महिलाओं को सुरक्षा उपलब्ध कराई गई।
• बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ योजना में 6,520 बालिकाओं को ड्राइविंग लाइसेंस और 8,637 को प्रतियोगी परीक्षा प्रशिक्षण।
• 12,670 आंगनवाड़ी केंद्र ‘सक्षम आंगनवाड़ी’ घोषित किए गए।
आगामी तीन वर्षों की कार्य योजनाएँ:
• 2026 से शहरी आंगनवाड़ियों में सेंट्रल किचन से गर्म भोजन की व्यवस्था।
• विज़न 2047 के अनुरूप प्री-स्कूल शिक्षा सुधार हेतु वर्कबुक एवं विकास कार्ड।
• लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत 34 लाख से अधिक बालिकाओं को छात्रवृत्ति/प्रोत्साहन राशि।
• 9,000 नए आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण।
• महिला सशक्तिकरण हेतु बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान।
• बेटो बचाओ–बेटी पढ़ाओ योजना में स्कूल छोड़ चुकी बालिकाओं की शिक्षा पूर्ण कराने एवं कौशल प्रशिक्षण की गतिविधियाँ।

