वी.के. त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:
गुरूद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब, पंजाबी कॉलोनी में सिखों के नौवें गुरु, साहिब श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शताब्दी शहीदी दिवस को अत्यंत श्रद्धा, प्रेम और श्रद्धाभाव के साथ मनाया गया। गुरुद्वारे में विचार गोष्ठी आयोजित हुई, जिसमें मुख्य अतिथि योगेश वर्मा (सदर विधायक) तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. ईरा श्रीवास्तव (अध्यक्ष, नगर पालिका लखीमपुर) ने शिरकत की और गुरु साहिब की शिक्षाओं पर प्रकाश डाला।
गुरु तेग बहादुर साहिब जी ने कठिन समय में हिन्दुस्तान के गरीबों, ज़रूरतमंदों और विशेष रूप से कश्मीरी पंडितों की धार्मिक स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा हेतु अपना शीश तक न्योछावर कर दिया। अत्याचार और जुल्म के विरुद्ध आवाज उठाते हुए उन्होंने मुगल शासक को चुनौती देते हुए कहा था कि “यदि गुरु तेग बहादुर का धर्म परिवर्तन करा लिया, तो पूरा हिन्दुस्तान धर्म परिवर्तन कर लेगा।” उनकी इसी महान कुर्बानी की याद में इस वर्ष भी गुरुद्वारे में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
17 से 24 नवंबर तक कार्यक्रम का विस्तृत विवरण
• प्रतिदिन सुबह 5 बजे प्रभात फेरी निकाली गई, जिसमें कीर्तन एवं भजन गायन के माध्यम से नगरवासियों को गुरु साहिब के संदेशों का स्मरण कराया गया।
• श्री अखंड पाठ साहिब जी का आरंभ किया गया।
• 25 नवंबर को श्री अखंड पाठ साहिब की समाप्ति एवं कीर्तन दरबार आयोजित हुआ।
• इस अवसर पर जालंधर से आए प्रसिद्ध कीर्तनी जत्था भाई संतोख सिंह जी तथा बरेली से आए कथा वाचक भाई हरप्रीत सिंह जी ने गुरु तेग बहादुर साहिब जी के अद्वितीय बलिदान, साहस और सत्य के मार्ग पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने संगत को समझाया कि जुल्म करना भी पाप है और जुल्म सहना भी पाप है। गुरु साहिब ने न केवल अपने उपदेशों को निभाया, बल्कि अपने जीवन का बलिदान देकर मानवता को नई दिशा दी।
इसी क्रम में ब्रेनोब्रैन संस्था द्वारा बच्चों से गुरु तेग बहादुर जी के जीवन पर प्रश्नोत्तरी कराई गई और सही उत्तर देने वाले बच्चों को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया। हजारों की संख्या में संगत ने कीर्तन, कथा और भजन-कीर्तन श्रवण कर गुरु साहिब के जीवन से प्रेरणा प्राप्त की और उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
उपस्थित पदाधिकारी एवं संगत
इस पावन अवसर पर प्रबंधक कमेटी के सदस्य—
स. रंजीत सिंह छाबड़ा
स. त्रिलोचन सिंह विक्की जुनेजा
स. जितेन्द्र सिंह छाबड़ा (रोमी)
स. हरपाल सिंह खुराना
स. गुरमीत सिंह गुलाटी
स. मनदीप सिंह छाबड़ा
स. गुरजीत सिंह जुनेजा
स. गुरनाम सिंह
स. बलदेव सिंह
स. सिमरनजीत सिंह
स. विक्रमजीत सिंह राना
तथा अनेक सेवादारों एवं संगत ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। लंगर सेवा के समापन के पश्चात हजारों की संख्या में संगत ने बिना किसी भेदभाव के गुरु का लंगर ग्रहण किया और सेवा भावना का अनुभव किया।
