अंकित तिवारी, ब्यूरो चीफ, प्रयागराज (यूपी), NIT:
इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा छात्रों के साथ लगातार किया जा रहा दुर्व्यवहार बेहद शर्मनाक है। आइसा (AISA) विश्वविद्यालय प्रशासन के इस अलोकतांत्रिक रवैये की तीखी निंदा करते हुए मांग करता है कि छात्रों के निलंबन को तुरंत वापस लिया जाए तथा गैर-लोकतांत्रिक व्यवहार पर रोक लगाई जाए।
आइसा का कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों की संगोष्ठियों और रचनात्मक कार्यक्रमों को रोकना तथा उसके विरुद्ध आवाज उठाने वाले छात्रों पर निलंबन की कार्रवाई करना न केवल निंदनीय है, बल्कि प्रशासन के मनमाने और शिक्षा-विरोधी रुख को भी उजागर करता है। इसी के विरोध में विश्वविद्यालय के छात्रों ने लाइब्रेरी गेट पर जोरदार प्रदर्शन किया और निलंबन वापस लेने की मांग उठाई।
प्रदर्शन में शामिल आइसा इकाई के सह-सचिव मानवेंद्र ने कहा कि “विश्वविद्यालय परिसर को छावनी में बदलकर छात्रों की रचनात्मक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है। छात्रों को सोचने, समझने, संवाद करने और विचार-गोष्ठी आयोजित करने से वंचित किया जा रहा है। इसके विरोध में आवाज उठाने पर छात्रों को निलंबित किया जा रहा है, जो पूरी तरह गैर-लोकतांत्रिक है।”
आइसा ने मांग की है कि विश्वविद्यालय प्रशासन के मनमाने और दुर्व्यवहारपूर्ण रवैये पर तुरंत रोक लगाई जाए तथा छात्रों पर की गई निलंबन कार्रवाई तुरंत रद्द की जाए। संगठन ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में लोकतांत्रिक माहौल बहाल किया जाए और छात्रों को बिना रोक-टोक रचनात्मक कार्यक्रम करने की अनुमति प्रदान की जाए।
आइसा ने यह भी मांग की कि छात्र-विरोधी प्रशासनिक अधिकारियों को बर्खास्त कर नए तथा जवाबदेह अधिकारियों की नियुक्ति की जाए। यदि मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो छात्रों ने चेतावनी दी है कि आंदोलन जारी रहेगा।
