मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

पाक्सो एक्ट के अंतर्गत आने वाले अपराध बहुत संगीन प्रकार के होते हैं। इन प्रकरणों के निगरानी और गहन समीक्षा राज्य शासन के निर्देश पर जिला पुलिस अधीक्षक द्वारा की जाती है। ज़िला अभियोजन कार्यालय बुरहानपुर द्वारा भेजे जाने वाले प्रेस विज्ञप्ति में प्राय: यह देखने में आया है कि पोक्सो एक्ट के तहत आरोपी को सज़ा ही होती है।

लेकिन महिला पुलिस थाना बुरहानपुर में पंजीकृत अपराध क्रमांक 16/2025 अंतर्गत धारा 74,75 (1) भारतीय न्याय संहिता 2023, धारा 7 सह पठित धारा 8 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 एवं धारा 3/ 181, 146/196 मोटरयान अधिनियम में अद्भुत विशेष प्रकरण में बुरहानपुर के विद्वान न्यायाधीश महोदय माननीय श्री इंदुकांत तिवारी साहब ने अभियुक्त की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता उबेद शेख की रहनुमाई में पैरवी कर रहे युवा अधिवक्ता शोएब अहमद द्वारा प्रस्तुत किए गए तर्कों के आधार पर अभियुक्त मीत भावसार पिता राजेश भावसार आयु 19 वर्ष निवासी उदासीन आश्रम के पास नागझिरी थाना गणपति नाका जिला बुरहानपुर को दिनांक 10 नवंबर 2025 को पारित 33 पृष्ठ के न्यायालयीन आदेश अनुसार आरोपित आरोप से बरी कर दिया है।
अधिवक्ता शोएब अहमद ने इस प्रतिनिधि को जानकारी देते हुए बताया कि बुरहानपुर जिला न्यायालय में पोक्सो एक्ट के अंतर्गत लगी धाराओं में केस नंबर एस सी 7/2025 अपराध क्रमांक 16/2025 धारा 74 75 बी एन एस पॉस्को 7/8 कानून की मंशा नाबालिग बेटियों के साथ होने वाले लैंगिक अपराध के सम्बन्ध में है। इस केस में अभियुक्त मीत भावसार पिता राजेश भावसार आयु 19 वर्ष निवासी नागझिरी बुरहानपुर की ओर से विद्वान न्यायाधीश श्रीमान इंदु कुमार तिवारी साहब के न्यायालय में उन्होंने पैरवी की है।
इस प्रकरण पर प्रकाश डालते हुए विद्वान अधिवक्ता शोएब अहमद ने बताया कि प्रायः कुछ केसों में यह देखने में आ रहा है कि को एजुकेशन में बच्चों की आपसी शुद्ध भाव की दोस्ती को भी माता-पिता पास्को एक्ट की धारा में रिपोर्ट के आधार पर दुरुपयोग करते हुए गलत फायदा उठाने की कोशिशें कर रहे हैं। जिस प्रकार 498 की धाराओं का दुरुपयोग विगत वर्षों में किया जा रहा था।
इसी परिपेक्ष में पास्को एक्ट के विशेष न्यायाधीश माननीय श्री इन्दु कांत तिवारी द्वारा शासन विरुद्ध मीत भावसार में पारित किए गए फ़ैसले में बहुत ही उल्लेखनीय निर्णय देते हुए विद्वान न्यायाधीश महोदय ने आरोपी को लैंगिक अपराधों से बालिकाओं का संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में दोषमुक्त घोषित किया है।
अपने फैसले में न्यायाधीश ने लिखा है कि अभियोजन अपनी पूरी कहानी को सन्देह से परे प्रमाणित करने में असफल रहा है और पीड़िता की स्वयं यह स्वीकारोक्ति है की आरोपी ने बुरी नीयत से उसका हाथ नहीं पकड़ा था और ना ही उसके साथ कोई गलत हरकत की थी और स्कूल की दोस्ती में हाथ मिलाने को बिल्कुल भी गलत नहीं माना जाता है । पीड़िता ने न्यायालय के समक्ष अपने कथन में यहां तक स्वीकार किया है कि पुलिस के सामने लिखाई गई रिपोर्ट उसके पिताजी के कहे अनुसार लिखी गई थी।
उसने मात्र हस्ताक्षर किए थे और साक्षियों के कथन से न्यायालय ने प्रमाणित पाया है कि मीत भावसार ने लैंगिक अपराध की परिभाषा का कोई भी अपराध नहीं किया है। ऐसी स्थिति में जब अभियोजन ही अपनी कहानी को साबित नहीं कर पाया है तो आरोपी दोषमुक्ति का पात्र हो जाता है।
इस पूरे मामले में अभियुक्त मीत भावसार की ओर से पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता उबेद शेख के निर्देशन व मार्गदर्शन में युवा अभिभाषक एडवोकेट शोएब अहमद ने की है।
युवा अधिवक्ता शोएब अहमद की इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर जिला अधिवक्ता संघ के नव निर्वाचित अध्यक्ष सत्य नारायण वाघ और सचिव एडवोकेट संतोष देवताले ने न्यायालय परिसर में एडवोकेट शोएब अहमद का अभिनन्दन कर कहा कि आज की युवा पीढ़ी के लिए यह प्रयास अनुकरणीय है।

