आलमी त्योहार ईद मीलादुन्नबी की दिली मुबारकबाद : शहर क़ाज़ी | New India Times

मोहम्मद इसहाक मदनी, ब्यूरो चीफ, मैहर (मप्र), NIT:

आलमी त्योहार ईद मीलादुन्नबी की दिली मुबारकबाद : शहर क़ाज़ी | New India Times

शहर क़ाज़ी रीवा मुफ्ती मुहम्मद मुबारक अज़हरी के दफ्तऱ से जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि इस्लाम के पैगंबर हज़रत मुहम्मद सल लल्लाहो अलैहि वसल्लम की पैदाइश की ख़ुशी सारी दुनिया में 12 रबीउल अव्वल को बड़े ही जोश व खरोश के साथ मनाई जाती है इस साल यह आलमी त्यौहार इस लिए भी ख़ास है क्यों कि यह 1500 साला ईद मीलाद उन नबी होगा जो कि 5 सितंबर 2025 ई. जुमे के दिन मनाया जाएगा, हर साल की तरह इस साल भी जश्ने ईद मीलादुन्नबी सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम के मुबारक मौके पर शहर क़ाज़ी की सरपरस्ती में इस्लाम के पैगम्बर हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम के मूए मुबारक शरीफ़ व दीग़र तबर्रुकात की ज़ियारत बाद नमाज़ फजर से मग़रिब तक दारुल उलूम फ़ैज़ाने इमाम शाह दाता बड़ी दरगाह रीवा में कराई जाएगी, शहर क़ाज़ी ने बताया कि मूए मुबारक शरीफ़ की ज़ियारत दुआओं की कुबूलियत, बीमारों को शिफ़ा व सवाब हासिल करने का ज़रिया है।

मीलाद उन-नबी इस्लाम धर्म के मानने वालों का प्रमुख त्यौहार है, हालांकि मीलाद उन नबी संसार के सबसे बडे जश्न के तौर पर मनाया जाता है, इस शब्द का मूल “मौलिद” है जिसका अर्थ अरबी में “जन्म” है। अरबी भाषा में ‘मौलूद-उन-नबी’ का मतलब हज़रत मुहम्मद की पैदाइश का दिन है, यह त्योहार इस्लामिक कैलेंडर में तीसरे महीने रबी अल-अव्वल की 12 तारीख को मनाया जाता है। पैगंबरे इस्लाम का जन्म मक्का में रबी उल-अव्वल के बारहवें दिन 570 ईस्वी में सोमवार के दिन सुबह सादिक़ के वक़्त हुआ। शहर क़ाज़ी ने कहा कि पैगंबरे इस्लाम की आमद के बाद पूरी इंसानियत ने उनसे फायदा हासिल किया, उन्होंने गुलामी की जंजीरों से लोगों को आज़ाद कराया, औरतों पर होने वाले ज़ुल्म को रोककर उन्हें उनके हुक़ूक़ अदा करते हुए विरासत में उन्हें हिस्सा देने का हुक्म दिया। मज़दूरों को उनकी मज़दूरी उनके पसीने के सूखने से पहले देने का हुक्म दिया, बुज़ुर्गों और बच्चों पर रहम का हुक्म दिया,

यह इस्लाम ही की तालीम है कि पत्थरों कंकरों को रास्ते से हटाना ईमान का हिस्सा बताया गया,  खुदा ने पैगंबरे इस्लाम को सारे जहान के लिए रहमत बना कर भेजा। शहर क़ाज़ी ने कहा कि हमेशा से पूरी दुनिया में लोग ईद मिलाद उन नबी के मौके पर खुशी का इजहार करते हुए एक दूसरे को मुबारकबाद पेश करते हैं, घरों, मोहल्लों, मस्जिदों और गलियों को सजाया जाता है, मस्जिदों एवं घरों में क़ुरआनख्वानी व मिलादे पाक की महफ़िलें सजाई जाती हैं, इस दिन खास तौर पर यतीमों की किफ़ालत, गरीबों मिस्कीनों और ज़रूरतमंदों की मदद की जाती है, सभी मुसलमान खास तौर पर इस दिन सुबह की नमाज़ जमात के साथ पढ़ें, ग़ुस्ल करें, अच्छा लिबास पहने, खुशबू का इस्तेमाल करें, कसरत से दुरूदे पाक का विर्द करें, महफिले मीलादे पाक का एहतिमाम करें, नमाज़ों की पाबंदी करें, मज़ाराते औलिया की ज़ियारत करें, भूखों को खाना खिलाएं, हर आम व खास की मदद करें, इस महीने में कसरत से रोज़े रखें या कम अज़ कम हर पीर (सोमवार) को रोज़ा रखें।

शहर क़ाज़ी ने सभी मुसलमानों से गुज़ारिश करते हुए कहा कि मीलादुन्नबी के जुलूस में पाक-साफ होकर इस्लामी लिबास पहन कर दुरूद शरीफ़ का विर्द करते हुए शरीक हों, जुलूस में किसी भी तरह का हथियार तलवार वगैरह लेकर हरगिज़ शरीक न हों, जुलूस में पटाखे एवं आतिशबाजी बिल्कुल ना करें, किसी भी तरह की खाने की चीज़ें फेक कर न दें, जुलूस के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले झंड़ों का एहतराम करें, इस्लामी माएं और बहनें जुलूस में शिरकत न करें, बल्कि घरों में रह कर नमाज़ दुरूद शरीफ क़ुरआन की तिलावत वगैरह का एहतिमाम करें, बहुत छोटे बच्चों को भी जुलूस में शामिल न करें, ऐसा कोई भी काम हरगिज़ न करें जिस से मुल्क में रहने वाले किसी भी मज़हब के मानने वालों को तकलीफ हो, शरीअत की पाबंदी, प्रशासन और जुलूस कमेटी की जानिब से जारी की गई गाइडलाइन का ख़ास ख्याल रखें।

By nit

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.