मॉब लिंचिंग प्रकरण में तथ्यों के आधार पर सवाल उठा रहे हैं सामाजिक संगठन : किस के दबाव में है पुलिस ? | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

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जलगांव जिले के जामनेर में राइट विंग की नफ़रती सोच द्वारा मॉब लिंचिंग कर मार दिए गए सुलेमान पठान के घर सांत्वना देने के लिए घटना के दस दिन बाद भी नेताओं का तांता लगा है। पुलिस ने आठ आरोपी गिरफ़्तार किए हैं जब की 10 संदिग्ध कानून के शिकंजे से अब भी दूर बताए जा रहे हैं। एस पी डॉ महेश्वर रेड्डी ने जांच के लिए एक SIT बना दी है। विपक्ष के आरोपों के बाद पुलिस इस केस में कुछ को राजबंदी बनाने में भी हिचकिचा रही है। मीडिया को SIT की ओर से खुली पत्रवार्ता का इंतजार है। इसके पहले सामाजिक संगठनों के लोग आम जनता से मिलकर केस हिस्ट्री को जानकर नए नए तथ्यो और तर्को को पुलिस के सामने रख रहे है। कुछ VIP’s और पुलिस महकमे के भीतर के तत्वों की हलचल पर संदेह जताया गया है।

मॉब लिंचिंग प्रकरण में तथ्यों के आधार पर सवाल उठा रहे हैं सामाजिक संगठन : किस के दबाव में है पुलिस ? | New India Times

अब जिस शहर के थाने में स्थानीय पुलिस कर्मचारियों की तैनाती को खास तवज्जो दिया गया हो उस कोतवाली का हाल किसी से कैसे छुप सकता है। NCPSP, कांग्रेस, AIMIM, राष्ट्रीय दलित पैंथर, समाजवादी पार्टी समेत सेक्युलर दलो के नेताओं ने राइट विंग वाली सोच की घोर आलोचना करी है। वंचित बहुजन आघाड़ी की शमीभा पाटील ने मॉब लिंचिंग के मुखालफत में जिले के यावल फ़ैजपुर में मोर्चा निकाला। गृह मंत्री देवेन्द्र फडणवीस के कार्यकाल मे जनता का पुलिस प्रशासन पर से भरोसा कम हो चुका है। अल्पसंख्यकों की मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिशा निर्देश जारी कर राज्यों के लिए एक व्यवस्था बनाई है।

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