तारिक खान, ब्यूरो चीफ, रायसेन (मप्र), NIT:

शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में गुरुवार को मध्यान्ह भोजन का जो “विशेष आयोजन” हुआ, उसने पूरे जिले में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवालिया निशान खड़े कर दिए। रोज़ाना गरीब व ज़रूरतमंद छात्राओं के लिए मिलने वाले साधारण मध्यान्ह भोजन की जगह कार्यक्रम में मंत्री, विधायक और नेताओं के लिए शाही दावत सजाई गई। थालियों में पूरी, कचौरी, कई तरह की सब्जियां, रायता, मिठाई, सलाद, मौसमी फल, मिनरल वाटर और सूखे मेवों तक की भरमार थी।
VIP की मेज़ पर चांदी जैसे थाल, बच्चियों के हिस्से में सवाल
स्कूल की अधिकांश बच्चियां इस भोजन से दूर नज़र आईं। दर्जनों की संख्या वाली छात्राओं में से केवल 3 कन्याएं ही मेज़ पर बैठी दिखीं, वो भी प्रतीकात्मक तौर पर। बाक़ी बच्चियां न तो इन थालियों तक पहुंच पाईं और न ही तस्वीरों में कहीं नज़र आईं। इससे साफ है कि ये आयोजन ‘जन कल्याण’ से ज़्यादा ‘VIP स्वागत’ पर केंद्रित था।
मध्यान्ह भोजन या नेताओं की दावत
मध्यान्ह भोजन योजना का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक और पर्याप्त भोजन देना है, ताकि उनकी पढ़ाई पर असर न पड़े। लेकिन यहां तस्वीर उलट थी रोज़ाना मिलने वाली दाल-चावल या खिचड़ी की जगह नेताओं के लिए सजे पकवान और बाकियों के लिए सिर्फ़ दिखावा।
नतीजा- गरीब बच्चियों के नाम पर तामझाम, नेताओं की थालियों में समर्पण
ये घटना सिर्फ एक स्कूल की कहानी नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की पोल खोलती है जिसमें गरीब बच्चों के अधिकारों पर राजनीति और दिखावे का रंग चढ़ा दिया जाता है। सवाल उठता है क्या योजना का पैसा और संसाधन वास्तव में लाभार्थियों तक पहुंच रहा है, या फिर VIP मेज़ों पर ही खत्म हो जाता है।

