रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

आध्यात्मिक गुरु भारत में जब हिंदुत्व की अलख जगती है तो चारों तरफ भगवा ही भगवा नज़र आने लगता है। हिंदुस्तान में आधे से ज्यादा आबादी हिन्दू की है वही गैर हिन्दू भी हिंदुत्व का स्पर्श किये बिना नहीं रहते। भारत देश में करोड़ों सनातनी हिन्दू मंदिर होंगें जो विभिन्न चमत्कारों के गवाह है वही आध्यात्मिक उद्देश्यों को लेकर पौराणिक कथाओं में उनके कथानक भी वर्णित है। भारत के जन्नत कहे जाने वालें काश्मीर की वादियों में हिमालय की गुफाओं में से एक गुफा जो बाबा बर्फानी के नाम से विश्व प्रसिद्ध है उसकी यात्रा के लिए देश और दुनिया के शिव भक्त बेसब्री से इंतज़ार करते हैं। श्रावण मास के पूर्व सप्ताह से रक्षाबंधन तक चलने वाली यह यात्रा न केवल आध्यात्मिक महत्व बताती है अपितु देश के जवानों की सेवा समर्पण व शौर्य के अनेक उदाहरण भी प्रस्तुत करती है। थांदला शहर के भोला भण्डारा परिवार द्वारा इन खूबसूरत वादियों में गोधरा दाहोद द्वारा चंदनवाड़ी के प्लॉट नम्बर 3 में लगाये जाने वालें लंगर में सहभागिता की जाती है वही वनांचल से इस यात्रा के लिए प्रेरित भी किया जाता है।

इस बार इस यात्रा में पहले जत्थे में एक साथ 40 यात्री शामिल हुए वही करीब 200 यात्रियों ने अपना पंजीयन करवाया है। सकुशल यात्रा से लौटे यात्रियों ने देवीगढ़ देवालय पर हनुमानजी महाराज के समीप बैठक का आयोजन कर अपने अनुभव साझा किए। यात्रा को लेकर पवन नाहर का कहना था कि यह एक ऐसी यात्रा है जो केवल आध्यात्मिकता का स्पर्श ही नही करवाती अपितु यहाँ लगने वालें हर लंगर से हर भक्त में स्वयं भोलें के दर्शन करवाती है व निःस्वार्थ सेवा की प्रेरणा मिलती है। यहाँ पर सरहदी जवानों में उनके अदम्य शौर्य पराक्रम के साथ उनके कोमल हृदय से मानवता के दर्शन होते है। यह यात्रा हमारें भारत माता के जयकारों व जय हिंद के उदघोषों से उनके हौसलों को बढ़ाती है। इस अवसर पर अन्य यात्रियों में कमलेश कुवाड, दिनेश सौलंकी, राहुल कलाल, रमेशचंद्र हिहोर आदि ने भी अपने अनुभव सुनाए।

यात्रा के दौरान समस्त व्यवस्थाओं के लिए किशोर पड़ियार, ललित शर्मा मित्र मंडल ने श्रीमंत अरोड़ा, मनोहरदास चौहान व मोहनलाल चौहान का शाल माला पहनाते हुए श्रीफल भेंट करते हुए सम्मान किया। इस अवसर पर उपस्थित पार्षद राजू धानक, पण्डित द्वारिका प्रसाद शर्मा, शांतिलाल सौलंकी, प्रकाशचंद्र सौलंकी, पंकज गौड़, विजय जोशी, मनोज उपाध्याय, आत्माराम शर्मा आदि का भी सम्मान सत्कार किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ पंकज खतेड़िया ने किया। इस अवसर पर महेश गढ़वाल, जीवन कलाल, मनीष अहिरवार, अश्विन सौलंकी, सोहनसिंह परमार, पंकज मालवी, विजयसिंह, जगदीश, मैथूसिंह बारिया, प्रेमसिंह, फरक्याजी, अमृतलाल चौहान, तुलसी मेहते, सुनील शर्मा, शैलेन्द्र चौहान, राकेश जोझा आदि अमरनाथ यात्री व समाजसेवी जन उपस्थित थे।
कावड़यात्रा का आमंत्रण: इस अवसर पर उपस्थित भोलें भक्तों में पण्डित द्वारिकाप्रसाद ने नगर की सबसे विशाल मातृशक्ति कावड़ यात्रा 10 जुलाई के बावड़ी मंदिर से देवीगढ़ तक के आयोजन को लेकर सबको आमंत्रित करते हुए उसकी रूपरेखा बताई। वही विजय जोशी ने 27 जुलाई को आयोजित थांदला इमली गणेश से शक्तिपीठ पिपलखुटा तक कावड़यात्रा में सपरिवार आने का न्यौता दिया। कार्यक्रम के बाद ललित मित्र मंडल ने प्रियभोज का आयोजन रखा जिसका सबने आंनद लिया।
