भोपाल का ऐशबाग ROB बना 'मौत का मोड़': डिज़ाइन की बड़ी चूक पर मचा बवाल, सुधार कार्य जारी | New India Times

जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

भोपाल का ऐशबाग ROB बना 'मौत का मोड़': डिज़ाइन की बड़ी चूक पर मचा बवाल, सुधार कार्य जारी | New India Times

ऐशबाग रेलवे ओवरब्रिज (ROB), जिसे “90 डिग्री रेलवे पुल” के नाम से जाना जाता है, के डिज़ाइन विवरण निम्नलिखित हैं, जो उपलब्ध जानकारी और हाल के विवादों के आधार पर संकलित किए गए हैं: पुल के डिज़ाइन के प्रमुख विवरण: स्थान और उद्देश्य: यह पुल भोपाल के ऐशबाग क्षेत्र में रेलवे ट्रैक के ऊपर बनाया गया है, जिसका उद्देश्य रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रैफिक जाम को कम करना और स्थानीय लोगों के लिए आवागमन को सुगम बनाना है। यह मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग (PWD) और भारतीय रेलवे के संयुक्त प्रयास से बनाया गया है। संरचनात्मक विशेषताएँ: लंबाई और चौड़ाई: पुल की कुल लंबाई और चौड़ाई के सटीक आँकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन यह दो लेन वाला पुल है, जो मुख्य रूप से हल्के वाहनों (दुपहिया और छोटे चार-पहिया वाहन) के लिए डिज़ाइन किया गया है।

विवाद का मुख्य बिंदु 90 डिग्री (वास्तव में 119 डिग्री) का तीखा मोड़ है, जो पुल के एक छोर पर स्थित है। मोड़ का डिज़ाइन: मोड़ का कोण शुरू में 119 डिग्री मापा गया, जो भारी वाहनों के लिए असुरक्षित और अव्यावहारिक पाया गया। मोड़ की त्रिज्या (radius) बहुत कम थी, जिसके कारण वाहनों को मुड़ने में कठिनाई होती थी, खासकर भारी वाहनों के लिए। डिज़ाइन में रेलिंग और गर्डर्स का उपयोग किया गया, लेकिन मोड़ की तीखी प्रकृति के कारण यह सुरक्षा के लिए खतरा बन गया। सामग्री और निर्माण:पुल में स्टील गर्डर्स और कंक्रीट का उपयोग किया गया है। निर्माण कार्य एक निजी ठेकेदार द्वारा किया गया, जिसे बाद में डिज़ाइन खामियों के लिए ज़िम्मेदार ठहराया गया।

डिज़ाइन की खामियाँ: तीखा मोड़: 119 डिग्री का मोड़ भारतीय सड़क मानकों (जैसे IRC – Indian Road Congress) के अनुरूप नहीं था, जो सामान्यतः वाहनों के लिए अधिक घुमावदार और कम कोण वाले मोड़ की सिफारिश करते हैं। चौड़ाई की कमी: मोड़ पर पर्याप्त चौड़ाई न होने के कारण वाहनों के लिए सुरक्षित रूप से मुड़ना मुश्किल था। सुरक्षा सुविधाओं की कमी: शुरूआती डिज़ाइन में गति नियंत्रण, दृश्यता के लिए दर्पण, रेडियम पट्टियाँ, और पर्याप्त स्ट्रीट लाइटिंग की कमी थी। जमीन की कमी: रेलवे ने शुरू में केवल 9 मीटर जमीन दी थी, जो डिज़ाइन को सीमित करती थी। बाद में अतिरिक्त 3 फीट जमीन देने का फैसला लिया गया। प्रस्तावित सुधार (री-डिज़ाइन):मोड़ का पुनर्गठन:मोड़ को अधिक घुमावदार (smoother curve) बनाने के लिए डिज़ाइन में बदलाव किया जा रहा है। इसके लिए त्रिकोणीय आधार पर गर्डर्स का उपयोग होगा। रेलिंग को हटाकर मोड़ की त्रिज्या को बढ़ाया जाएगा, जिससे वाहनों को मुड़ने के लिए अधिक जगह मिलेगी।

सुरक्षा उपाय:स्पीड ब्रेकर, रेडियम पट्टियाँ, और दृश्यता के लिए दर्पण लगाए जाएँगे। गति सीमा 30 किमी/घंटा तक सीमित होगी। 20 नई स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएँगी। चौड़ाई में वृद्धि: रेलवे द्वारा अतिरिक्त 3 फीट जमीन उपलब्ध कराने के बाद, मोड़ को चौड़ा करने की योजना है।वाहन प्रतिबंध: पुल को केवल हल्के वाहनों (दुपहिया और छोटे चार-पहिया) के लिए खोला जाएगा, भारी वाहनों को प्रतिबंधित किया जाएगा।तकनीकी और प्रशासनिक पहलू:डिज़ाइन स्वीकृति: डिज़ाइन को PWD और रेलवे के इंजीनियरों ने संयुक्त रूप से मंजूरी दी थी, लेकिन बाद में खामियों के लिए जिम्मेदारी तय की गई।ठेकेदार और सलाहकार: निर्माण और डिज़ाइन में शामिल ठेकेदार और सलाहकार एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट किया गया है।जांच और निगरानी: एक तकनीकी समिति ने डिज़ाइन की खामियों की जांच की और सुधार के लिए सुझाव दिए। रेलवे बोर्ड की मंजूरी के बाद ही नया डिज़ाइन लागू होगा।

निर्माण लागत और समयसीमा: लागत: शुरूआती निर्माण लागत की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, लेकिन सुधार कार्य का खर्च ठेकेदार वहन करेगा।समयसीमा: निर्माण मई 2022 में शुरू हुआ था और अगस्त 2024 तक पूरा होने की उम्मीद थी, लेकिन डिज़ाइन खामियों के कारण यह प्रक्रिया जून 2025 तक चल रही थी। सुधार कार्य की सटीक समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है।विशेष नोट:इस डिज़ाइन को सोशल मीडिया पर “इंजीनियरिंग का अजूबा” या “मौत का मोड़” कहकर आलोचना मिली थी, क्योंकि यह असामान्य और असुरक्षित था।डिज़ाइन की खामियों के लिए सात इंजीनियरों (दो मुख्य अभियंता सहित) को निलंबित किया गया, और मध्य प्रदेश सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है।री-डिज़ाइन के बाद, पुल को अधिक सुरक्षित और व्यावहारिक बनाने का लक्ष्य है, लेकिन यह अभी भी निर्माण और सुधार के चरण में है।

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