नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

ईरान और इजराइल की जंग ने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की कगार पर खड़ा कर दिया है। भारत में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्षा सोनिया गांधी ने द हिन्दू में लिखे लेख में मोदी सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं। गांधी ने भारत ईरान के पुराने संबंधों को याद दिलाते हुए गाज़ा और ईरान पर भारत सरकार की चुप्पी की आलोचना की है। इस लेख के विरोध में बीजेपी के किसी भी नेता ने भारत की विदेश नीति की सफलता को लेकर कोई लेख नहीं लिखा। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव घोटाले पर राहुल गांधी ने एक लेख लिखा देश के मुख्य अखबारो ने 14 भाषाओं में इसे प्रकाशित किया। राहुल ने आरोप चुनाव आयोग पर लगाए और जवाब बीजेपी देने लगी। चुनाव आयोग के प्रमुख प्रवक्ता बन बैठे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने तो जवाबी लेख लिख डाला।

फडणवीस को सोनिया गांधी के लेख पर भी लेख लिखना चाहिए। भारत की ओर से पाकिस्तान के ख़िलाफ़ किए गए ऑपरेशन सिन्दूर के बाद मोदी सरकार का प्रचार करने वाले देवेन्द्र फडणवीस को एस जयशंकर की जगह विदेश मंत्री बनाया जाना चाहिए। बैसारन में आतंकी कैसे आए? वहां सुरक्षा क्यों नहीं थी? हमले को अंजाम देने वाले चारों आतंकी अब तक पकड़े क्यों नहीं गए? भारत ने ट्रंप के दबाव में युद्धविराम क्यों किया? युद्ध विराम की शर्तें क्या थीं जैसे सवालों के जवाबों से बचने के लिए संसद के विशेष सत्र से भागने वाली नरेन्द्र मोदी सरकार की विदेश नीति देश की सुरक्षा के लिए नई समस्या पैदा कर रही है। भारत का गोदी मीडिया धार्मिक आधार पर ईरान के विरोध में भारतीय जनता के बीच दुष्प्रचार फैला रहा है। 1994 में नरसिम्हा राव सरकार ने कूटनीतिक स्तर पर ईरान की मदत से पाकिस्तान को शिकस्त दी थी। जम्मू कश्मीर को मानवाधिकार मुद्दे से जोड़कर UN में न्यायप्रविष्ट करने की योजना बना चुके पाकिस्तान के खिलाफ़ जाकर ईरान ने भारत का पक्ष लिया था आज वही भारत ईरान को लेकर खुलकर बोल नहीं पा रहा है।

