यूसुफ खान, ब्यूरो चीफ, धौलपुर (राजस्थान), NIT:

बच्चों के पोषण स्वास्थ्य और शिक्षा को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए वेदांता के नंद घर ने ‘प्रोजेक्ट बालवर्धन’ की शुरुआत की है। यह एक अहम पहल है, जिसका लक्ष्य बच्चों के संपूर्ण विकास को बढ़ावा देना और कुपोषण को खत्म करना है। इस प्रोजेक्ट के तहत टेक्नोलॉजी सामुदायिक भागीदारी और वैज्ञानिक उपायों की मदद से पोषण और शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाया जाएगा नंद घर अनिल अग्रवाल फाउंडेशन की एक प्रमुख सामाजिक पहल है जो देश की आंगनवाड़ी प्रणाली को अत्याधुनिक सुविधाओं से सशक्त बना रही है। इन्फ्रास्ट्रक्चरल सुविधाओं के अलावा नंद घर बच्चों के लिए स्मार्ट टीचिंग टूल्स इंटरैक्टिव ई-लर्निंग मॉड्यूल ‘बिल्डिंग ऐज़ लर्निंग एड बाला डिज़ाइन और स्मार्ट टीवी जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है, जिससे 3 से 6 साल के बच्चों की पढ़ाई रोचक और प्रभावशाली बन सके। जिला स्तर पर इस कार्यक्रम की शुरुआत के लिए धौलपुर में एक ऑन-ग्राउंड लॉन्च आयोजित किया गया इस अवसर पर नंद घर के सीईओ शशि अरोड़ा धौलपुर के जिला कलक्टर श्रीनीधि बी.टी. आईएएस और धीरेंद्र सिंह उप निदेशक आईसीडीएस धौलपुर जैसे प्रमुख अधिकारी मौजूद रहे। इस कार्यक्रम में प्रोजेक्ट बालवर्धन की सोच उद्देश्य और इसके संभावित प्रभाव पर चर्चा की गई। साथ ही स्थानीय लोगों की भागीदारी ने इस पहल की जड़ों को समुदाय और स्थानीय प्रशासन से गहरे रूप से जुड़ा हुआ दिखाया कार्यक्रम में 300 से अधिक समुदाय सदस्य शामिल हुए इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए समुदाय की भूमिका को मज़बूत करने और आंगनवाड़ी सेवाओं को ज़मीनी स्तर पर और बेहतर बनाना था इस परियोजना का लक्ष्य धौलपुर ज़िले में 0 से 6 साल के 80,000 से अधिक बच्चों और 15,000 से अधिक गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को लाभ पहुंचाना है।धौलपुर को एक आकांक्षी और उत्कर्ष ज़िला घोषित किया गया है। इस ज़िले के हर कोने तक इस पहल को पहुँचाने के लिए 800 से ज्यादा आंगनवाड़ियों को आधुनिक नंद घर में बदला जाएगा अब तक 4,800 से अधिक नंद घर बनाए जा चुके हैं और इन्हें बढ़ाकर 25,000 तक करने की योजना है। यह परियोजना राज्यभर में बच्चों और माताओं की सेहत और विकास के लिए एक बड़े बदलाव की दिशा में अहम कदम है। इस अवसर पर ज़िला कलेक्टर श्रीनिधि बी.टी. ने कहा अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के साथ मिलकर धौलपुर में प्रोजेक्ट बालवर्धन शुरू करना हमारे लिए गर्व की बात है। यह पहल बच्चों से जुड़ी गंभीर समस्याओं से निपटने के लिए ज़मीनी काम तकनीक और असरदार उपायों को एक साथ लेकर आई है। धौलपुर में कुपोषण की स्थिति चिंताजनक है जैसे बच्चों के विकास में बाधा कम वज़नी बच्चे और गंभीर कुपोषण इस परियोजना के ज़रिए हम पूरे ज़िले में कुपोषण खत्म करने की कोशिश करेंगे और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी मजबूत बनाएंगे यह सरकार और समाज के साथ मिलकर स्थायी बदलाव लाने का नया तरीका है। इस सोच को आगे बढ़ाते हुए नंद घर के सीईओ शशि अरोड़ा ने कहा प्रोजेक्ट बालवर्धन हमारी उस यात्रा का अगला कदम है जिसका मकसद ज़मीनी स्तर से मजबूत और आत्मनिर्भर समुदायों का निर्माण करना है। हम डेटा आधारित पोषण आधुनिक बाल शिक्षा और मातृ स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को एक साथ जोड़ते हुए एक नया मानक स्थापित कर रहे हैं। यह सिर्फ सुविधाएं देने की बात नहीं बल्कि बच्चों के जीवन के सबसे अहम चरण में उनकी संभावनाओं को संवारने की कोशिश है। डिजिटल ग्रोथ मॉनिटरिंग टूल्स विशेष पोषण कार्यक्रमों और स्मार्ट ईसीसीई मॉडल की मदद से हम सिर्फ धौलपुर ही नहीं बल्कि देश के हर ज़रूरतमंद ज़िले में बदलाव की नींव रख रहे हैं। राज्य और ज़िला प्रशासन के साथ हमारी साझेदारी यह दिखाती है कि हम सबका साझा उद्देश्य हर बच्चे को एक बेहतर शुरुआत और हर मां को पूरा सहयोग मिलना चाहिए हम मिलकर एक स्वस्थ और सशक्त भारत की नींव तैयार करने का प्रयास कर रहे हैं। प्रोजेक्ट बालवर्धन का मूल उद्देश्य माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य व पोषण को बेहतर बनाना है। इसके तहत समुदाय में जागरूकता फैलाने के लिए एक विशेष एसबीसीसी अभियान चलाया जा रहा है। इस पहल में पोषण को बेहतर बनाने स्वास्थ्य की नियमित निगरानी करने और बच्चों की प्रारंभिक देखभाल व शिक्षा पर खास ध्यान दिया गया है ताकि उनका समग्र विकास हो सके साथ ही इस पूरी प्रक्रिया की प्रभावशीलता को बनाए रखने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग और मूल्यांकन प्रणाली लागू की गई है, जिससे प्रोजेक्ट की प्रगति और परिणामों पर लगातार नज़र रखी जा सके

