अतिश दीपंकर, पटना (बिहार), NIT;
बिहार के शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा ने कभहा है कि राजकीय पक्षी ‘गौरैया’ का बसेरा कभी इंसानों के घर-आंगन में हुआ करता था। लेकिन अब यह बहुत कम दिखती हैं, जरूरत है इसके संरक्षण की।
आज कालेज ऑफ कामर्स, आर्ट्स एंड साइंस, पटना के ‘स्ट्राइड’ कार्यक्रम के अवसर पर प्रेस इन्फोर्मेशन ब्यूरो, पटना के सहायक निदेशक और लेखक-पत्रकार संजय कुमार द्वारा खींची गौरैया की फोटो प्रदर्शनी ‘मैं जिंदा हूँ…..गौरैया’ का उद्धाटन करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि गौरैया की संख्या में कमी आई है जो चिंता का विषय है। ऐसे में संजय कुमार की फोटो प्रर्दशनी गौरैया’ संरक्षण का संदेश देती है।
विलुप्त होती ‘गौरैय’ की तस्वीरों की तीन दिवसीय फोटो प्रदर्शनी ‘‘मैं जिंदा हूँ…..गौरैया’’, कालेज ऑफ कामर्स, आर्ट्स एंड साइंस, पटना के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग और सी आर डी एफ के सहयोग से आयोजित की गयी है।
मौके पर कालेज के प्राचार्य प्रो. डा. जैनेन्द्र कुमार ने किया कहा कि छोटे आकार वाली खूबसूरत गौरैया पक्षी का ज्रिक आते ही बचपन की याद आ जाती है। हमें इसके बचाव के उपाय करने होंगे।
पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के काडिनेटर प्रो.डॉ तारिक फातमी ने कहा कि संजय कुमार की यह प्रदर्शनी गौरैया संरक्षण के प्रति जागरूकता लाने में अहम विशेष भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि कालेज और विभाग की कोशिश है कि पयार्वरण को बचाने की हर प्रयास हो इसलिए यह पहल की गई है।
इस अवसर पर लेखक -पत्रकार संजय कुमार ने कहा कि इस फोटो प्रदर्शनी का मकसद लोगों को गौरैया के प्रति संवेदनशील बनाना है। ताकि विलुप्त होती इस नन्हीं सी जान का संरक्षण हो सकें। श्री कुमार ने कहा कि घर-आंगन में चहकने-फूदकने वाली छोटी सी प्यारी चिड़िया गौरैया की आबादी में 60 से 80 फीसदी तक की कमी आई है।
गौरैया की विभिन्न अदाओं को समेटे फोटो प्रदर्शनी छात्र-छात्राओं और लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। कुल 30 फोटो अलग-अलग अदा में है। फोटो के साथ कैप्शन भी दिया गया है।
कैप्शन को काव्य शैली में दिनेश कुमार ने लिखी है जो लोगों को अपनी ओर खींच रही है।
इस अवसर पर कालेज ऑफ कामर्स, आर्ट्स एंड साइंस, पटना के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के छात्र-छात्राएं और सी आर डी एफ के साकिब जिया, इमरान, लीना सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
