रिपोर्ट कार्ड का रिजल्ट घोषित, मंत्रियों के अधिकारों पर चली कैंची, शिंदे-पवार की बल्ले बल्ले | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

रिपोर्ट कार्ड का रिजल्ट घोषित, मंत्रियों के अधिकारों पर चली कैंची, शिंदे-पवार की बल्ले बल्ले | New India Times

बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व कि ओर से मुहर लगने के बाद देवेन्द्र फडणवीस मंत्री परिषद के सभी 36 मंत्रियों को विभागों का बंटवारा कर दिया गया है। CM देवेन्द्र फडणवीस को गृह और ऊर्जा , DCM एकनाथ शिंदे नगर विकास PWD , अजीत पवार को वित्त एवं आबकारी मंत्रालय सौंपा गया है।‌ खबर में प्रकाशित बंदरबाट की लिस्ट पाठकों के लिए है। बीजेपी ने अपने रिपोर्ट कार्ड में जातिगत संतुलन को साधते हुए रिपीट किए गए पुराने सदस्यों के पर कतर दिए हैं। चंद्रशेखर बावनकुले (राजस्व ), जयकुमार गोरे (ग्राम विकास), गणेश नाइक (वन) , शिवेंद्र राजे भोसले (PWD स्वतंत्र) , संजय सावकारे (कपड़ा) जैसे नए चेहरों को पूर्ण अधिकार संपन्न विभाग दिए हैं। 2014-19 के बीच अखंड रहे जलसंपदा विभाग को दो हिस्सों में खंड खंड किया गया है।

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राधाकृष्ण विखे पाटील को गोदावरी-कृष्णा नदी प्रणाली के तहत आने वाले मराठवाड़ा – पश्चिम महाराष्ट्र के 15 जिलों का मंत्री बनाया गया है। गिरीश महाजन को विदर्भ , उत्तर महाराष्ट्र (तापी), कोंकण के 16 जिलों का भार सौंपने के साथ साथ NCP के मकरंद पाटील को दिए सहायता पुनर्वास विभाग से आपदा प्रबंधन को तोड़कर महाजन के विभाग में जोड़ दिया गया है। ज्ञात हो कि जल संपदा के अंतर्गत वैधानिक विकास प्राधिकरणों (जल बोर्ड) के अध्यक्षों को भी सरकार में राज्य मंत्री का दर्जा हासिल है। अतीत में कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल में भी इस विभाग में दो मंत्री बनाए जा चुके हैं। तब और अब का विपक्ष इसको नेताओं के किए गए डिमोशन की नजर से देखता आया है।

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बीजेपी के सहयोगी एकनाथ शिंदे श-अजीत पवार की ओर से नए और पुराने चेहरों को काफ़ी महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी गई है। दिल्ली से चुने जाएंगे संरक्षक मंत्री ? : महाराष्ट्र के 15 जिले बिना कैबिनेट मंत्रियों के है। किसी भी पार्टी के संगठन के लिए कैबिनेट मंत्री को जिला स्तर पर अभिभावक मंत्री बनाया जाता है। गृह जिले पर वर्चस्व और प्रभाव की चाह रखने वाले कई मंत्रीयो को शायद दिल्ली के आदेश पर दूरदराज के जिलो की जिम्मेवारी संभालना पड़ सकती है।

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