ग्वालियर किले में स्थित गुजरी महल का इतिहास  | New India Times

संदीप शुक्ला/पवन परूथी, ग्वालियर (मप्र), NIT; ​ग्वालियर किले में स्थित गुजरी महल का इतिहास  | New India Timesगुजरी महल प्रसाद तोमर वंश के यशस्वी राजा मानसिंह तोमर सन् 1486 – 1516 ने अपनी प्रियतमा गुजरी रानी ( मृगनयनी ) के लिए बनवाया था। इसी महल में पुरातत्वीय संग्रहालय की स्थापना सन् 1920 में श्री एम् पी गर्दे द्वारा कराई गयी थी जिसे सन् 1922 में दर्शकों के लिये खोल गया था।​ग्वालियर किले में स्थित गुजरी महल का इतिहास  | New India Timesगुजरी रानी की शर्त के अनुसार राजा मानसिंह ने मृगनयनी के मैहर राइ गांव जो ग्वालियर से 16 मील दूर स्थित था, वहां से पाइप के द्वारा पीने के पानी के लाने की व्यवस्था की थी, क्योंकि मृगनयनी को यहाँ का पानी पसंद नहीं था।​

महल के प्रस्तर खंडों पर खोदकर बनाई गयी कलात्मक आकृतियों में हाथी, मयूर अदि और बाहरी भाग में गुम्बदाकार छत्रियों की अपनी ही विशेषता है तथा मुख्य द्वार पर लगा फ़ारसी शिलालेख इस महल के निर्माण की गाथा बताता है।​ग्वालियर किले में स्थित गुजरी महल का इतिहास  | New India Timesसंग्रहालय के 28 कक्षों में मध्य प्रदेश की विभिन्न कलाकृतियों का समुचित प्रदर्शन किया गया है।

इस संग्रहालय की विभिन्न प्रतिमाएं कई बार देश विदेशों में भेजी जा चुकी हैं। यह जानकारी पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर एस आर वर्मा के द्वारा प्राप्त हुई है।

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