नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बाद अब गृहमंत्री अमित शाह ने महाराष्ट्र का चक्कर लगाना शुरू कर दिया है। शिवसेना (BT) के पास सात सांसद होने के कारण भाजपाईयों की एकनाथ शिंदे पर पैनी नजर है। महाराष्ट्र विधानसभा के नतीजों के बाद कही इंडिया गठबंधन के पक्ष में 240+16+12+7=275 का टोटल न बन जाए इसका डर भाजपा को सता रहा है। अमित शाह ने प्रदेश भाजपा कोर कमेटी बैठक में हिस्सा लिया है। सूत्रों के मुताबिक आगामी चुनाव में भाजपा अपने विद्यमान मंत्रियों के टिकट काटने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
2014-2019 के लोकसभा चुनाव , गुजरात , मध्य प्रदेश विधानसभा और अब हरियाणा विधानसभा के चुनावों में पार्टी ने सैकड़ों सांसदों विधायकों मंत्रियों का टिकट काटकर उनकी सीट से नए चेहरे को मैदान में उतारकर उन्हें चुनाव जितवाया है। महाराष्ट्र में भाजपा की 40 सीटें ऐसी है जहां से बीते 25/30 साल से एक हि प्रत्याशी RSS और हिंदूवादी संगठनों के कैडर के बदौलत विधायक बनता आ रहा है। इन 40 सीटों का OBC/NT/VJNT/SC/ST मतदाता मजबूत विकल्प के अभाव में मजबूरन भाजपा की ओर शिफ्ट कर जाता है। बार बार लगातार चुनकर भेजे जाने वाले पुराने पड़ चुके इन चेहरों के प्रती जनता में पनप रही उमस को कांग्रेस प्रणीत महाविकास आघाड़ी सक्षम विकल्प के रूप में बल देने का प्रयास कर रही है।
भाजपा अपनी इन पारंपरिक सीटों को बरकरार रखने के लिए विद्यमान पुराने उनसे भी पुराने और अधिकतम नए चेहरों को मौका देने की संभावना को तलाश रही है। इस निति को अमल में लाने की मुख्य वजह लोकसभा चुनाव में स्टार प्रचारक रहे भाजपा नेताओं के घटिया मेरिट को बताया जा रहा है। मंत्रियों के टिकट कटे तो वहां कांग्रेस और अन्य दलों से आयत किए गए कितनों को टिकट मिलेगा यह आनेवाला समय बताएगा। लोगों के बीच देवेंद्र फडणवीस के प्रती व्याप्त असंतोष के चलते भाजपा ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में चुनाव लड़ने का निर्णय किया है।

