नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

महाराष्ट्र के राज्यपाल ने नार-पार नाम के एक से अधिक नदियों को जोड़ने और उनको उनकी मूल दिशा के विपरीत मोड़ने वाले प्रोजेक्ट को प्रायोगिक जी हां केवल प्रायोगिक सहमती दर्शायी है। महाराष्ट्र में विधानसभा के आम चुनाव होने हैं, महायूती सरकार ने शासकीय योजनाओं के प्रचार के नाम पर भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियों के प्रचार के लिए सरकारी खजाने से 270 करोड़ का बजट निर्धारित कर रखा है। अखबारों के पन्नों में सरकारी विज्ञापनों के साथ-साथ मंत्रियों के लुभावने बयान, नए नए प्रोजेक्ट्स के ऐलान जैसी खबरें परोसने का ट्रेंड शुरू हो गया है। नार-पार उसी में से एक है ज्यादा कुछ नहीं। राजभवन की प्रायोगिक मान्यता के बाद इस योजना को प्रशासकीय स्वीकृति मिलनी है फिर 7 हजार 500 करोड़ रूपए का फंड उपलब्ध कराना पड़ेगा। फंड के बाद प्रशासन को भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आरंभ करनी होगी इस दौरान कोर्ट कचहरी चलेगी वगैरह वगैरह। मज़े की बात यह है कि केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट को धन देने से इंकार कर दिया है। नार-पार, दमनगंगा, पिंजाल, देव, अंबिका यह सब पश्चिम दिशा की ओर बहने वाली नदियां हैं जो आगे गुजरात में अरब सागर में जा कर मिलती हैं।

नदी जोड़ के अंतर्गत नार-पार को उत्तर दिशा में बहने वाली गिरणा नदी से जोड़ना है। नदियों की कनेक्टिविटी पहाड़ों में सुरंग बनाकर होगी या फिर पानी को कैनाल से लिफ्ट करवाकर होगी इसके बारे में कोई ठोस प्लान नहीं है। प्राकृतिक रूप से बहने वाली किसी नदी के बहाव को विपरीत दिशा में मोड़ना कितना ख़तरनाक साबित हो सकता है और यह प्रकृति के साथ खिलवाड़ नहीं है तो क्या है? क्या राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण इसे मंजूरी देगा? विकास का नाम लेकर तीस तीस सालों के राजनीतिक कैरियर में संरक्षित ठेकेदारी कट प्रैक्टिस से सैकड़ों करोड़ रुपया कमाने वाले नेता चुनाव जीतने के लिए जनता को झूठे सपने बेचकर चुनकर आते हैं। विधायक गिरीश महाजन ने 2009 से नार-पार के लिए पहुर-शेंदूर्णी-वाकोद में किसानों की संघर्ष कमेटियां बनाई, देवेन्द्र फडणवीस सरकार में पूरे पांच साल जलशक्ति मंत्री रहे गिरीश महाजन ने इस प्रोजेक्ट के लिए एक पैसा नहीं दिया। सरकार में शामिल पार्टियां आज नार-पार को प्रायोगिक मान्यता देकर खिसकते हुए जनमत को अपनी ओर मोड़ने की कवायद में जुटी हैं।
New India Time’s आप पाठकों को इस प्रोजेक्ट की तकनीकी जानकारी और नेताओं के राजनीतिक नफे नुकसान से रूबरू करवाने का प्रयास करेगा।

