नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

भारत के किसी भी शहर में नहीं होगा ऐसा जामनेर का प्रवेश द्वार जो Y शेप में है इसे नितिन गडकरी को खुद आ कर देखना चाहिए। यहीं से शुरू होने वाली वन वे टू लेन जिसे 8 करोड़ रुपए की लागत से 2016 में बनाया गया आज इसी सड़क को फिर से करोड़ों फूंककर विधानसभा चुनाव के लिए चमकाया जा रहा है। शिवाजी महाराज नगर से रेस्ट हाउस तक पीली रंग की रौशनी से सड़क को भिगोने वाले लैंप्स। बीचोंबीच रोपे गए बड़े बड़े पेड़ नूमा पौधे ये सारा डेकोरेशन फोरलेन की ऊपरी सतह को चमकाएगा और उसके नीचे दफ़न भ्रष्टाचार को छुपाएगा।
इस प्रोजेक्ट को लेकर New india Times ने अनेक खोजी रिपोर्ट प्रकाशित करी है। आज हम फोरलेन के बहाने राजनेताओं की ओर से अपनाई जा रही विषमतावादी सोच की बात करेंगे। जामनेर का एक हिस्सा जिसमें शहर की आधी आबादी बसती है उसमें से गुजरने वाली जूना बोदवड सड़क का विकास क्यों नहीं किया जा रहा है? मुस्लिम समाज की दस हजार की आबादी का बड़ा हिस्सा इसी सड़क के जरिए दुनिया जहान से जुड़ता है। किसी ज़माने में यातायात के लिए रीड़ की हड्डी मानी जाती यह सड़क आज खस्ताहाल कर दी गई है।
इस सड़क को अंजुमन स्कूल और NH 753L को जोड़ने के लिए सांसद विधायक फंड से खर्चा किया गया लाखों रुपया ठेकेदार चट कर गए। पुराने जामनेर में तंग बसावट के कारण विकास का मास्टर प्लान लागू नहीं हो सकता। इन इलाकों में बनी कांक्रिट सड़के हर पांच साल में उखड़ जाती है दोबारा रिपेयर की जाती है। प्रशासन की ओर से अतिक्रमण के नाम पर बुलडोजर चलाकर फैलाए जाने वाले डर से समाज में नफरती विभाजनवादी विचारों को बल दिया जाता है। कापड़ गली, श्रीराम पेठ , इस्लामपुरा , वाणी गली , पहुर गली , जकात नाका , बिस्मिल्ला नगर , घरकुल , मदनी नगर समेत अन्य इलाकों में बुनियादी ढांचे के विकास और सुशोभीकरण को साफ़ तौर पर नकारा जाता आ रहा है। प्रासंगिकता के अनुसार नगर परिषद में विपक्ष को खरीदने तथा ख़त्म कर दिए जाने के कारण लोकतंत्र एक तंत्र में बदल चुका है। नए जामनेर में जिस तरह सजावटी विकास कराया जा रहा है वैसा हि क्यों न हो ? पर कुछ न कुछ विकास पुराने शहर के उक्त अंधियारे जनजीवन में कराया जाना चाहिए। ज्ञात हो कि आज नगर परिषद में प्रशासक बैठा है, साढ़े सात साल तक मंत्री गिरीश महाजन की पत्नी साधना महाजन नगराध्यक्ष रही हैं।
