पारदेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में अनास नदी के तट पर मनाया गया फागोत्सव | New India Times

रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

पारदेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में अनास नदी के तट पर मनाया गया फागोत्सव | New India Times

महिला मंडलों के द्वारा अनास नदी के पावन तट स्थित पारदेश्वर महादेव मंदिर पर भगवान भोलेनाथ के विवाहोपलक्ष्य तथा विवाहोपरान्त माता पार्वती का गौना (आणा) लाने एवं देव दर्शन तथा पुष्पो से होली का आयोजन किया गया। सुश्री रूकमणी वर्मा ने जानकारी देते हुए बताया की महिला मंडल द्वारा इस अवसर पर रंगारंग भजनों की प्रस्तुति दी गई। साथ ही सभी महिलाओ ने संगीतमय भजनों के साथ  फाग उत्सव धुम धाम श्रद्धा भावना के साथ नृत्य करते हुए मनाया गया।

इस अवसर पर निवेदिता सक्सेना ने महिला सशक्तिकरण पर उदबोधन देते हुए कहा की हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है कि यत्र नार्यस्तु पूज्यन्त रमंते तत्र देवता उन्होंने कहा की महिला का सम्मान ही परिवार का सम्मान होता है। समाज में पुरुष और महिलाओं के बीच के भेद भाव को मिटाकर समानता लाने के प्रयास के लिए महिला दिवस भी मनाया जाता है। इतना ही नहीं आज तक महिलाओं ने अपने परिवार, अपने दोस्तों, अपने समाज और अपने देश के लिए जो भी काम किए हैं, उन सभी के लिए उन्हें धन्यवाद देने का हमारा फर्ज बनता है। हमारे शास्त्र कहते है कि जहां मातृ शक्ति का सम्मान होता है वहां देवता स्वयं निवास करते है। शिव पार्वती का परिवार इसका उत्कृष्ठ उदाहरण है जो हमे परिवार में परस्पर सम्मान की शिक्षा देते है। इस अवसर पर श्रीमती सूरज डामोर ने कहा कि शिव-पार्वती विवाह आध्यात्मिक दृष्टि से शिव का शक्ति से मिलन है।

माता पार्वती जीवात्मा का प्रतीक है और भगवान शिव परमात्मा है। प्रत्येक जीवात्मा परमात्मा से पार्वती की तरह मिलने के लिए व्याकुल है। भगवान को पाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर प्रयास कर रहा है। भगवान शिव के परिवार में रहन-सहन और खान पान में काफी विषमताओं के बावजूद भी सभी प्रेम, एकता और भाई चारे की भावना से रहते हैं क्योंकि देवताओं के जो प्रतीकात्मक पशु वाहन हैं वे शत्रुता के बीच मित्रता का भाव जाग्रत करते हैं और अपने स्वभाव अपनी प्रवृति को छोड़े बिना सभी से मिल जुलकर रहते हैं।

सामाजिक तौर पर देखें तो परिवारों में भी यह जरूरी है अलग-अलग विचारों, अभिरूचियों, स्वभावों के बावजूद हम लोग मिल कर रहें अपनी सोच दूसरों पर न थोपी जाय और सबसे खास बात यह कि मुखिया और अन्य बड़े सदस्यों को थामें रखने का धीरज और सबको साथ लेकर चलने की आदत हो तभी संयुक्त परिवार चल सकते हैं। यह बात हमारे परिवार तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए वरन् हमारे देश में विभिन्न धर्मो, जाति और विविधताओं के बीच एकता व संतुलन शिव परिवार की तरह जरूरी है। जिस प्रकार शिव परिवार में माता पिता पुत्र-पुत्री का किस प्रकार सम्मान किया गया कितनी भी कठिन परिस्थिति हो उसका धैर्यता के साथ सामना करना चाहिये। इस अवसर पर श्रीमती चंदनबाला शर्मा एवं कल्पना राणे द्वारा भी महिला सशक्तिकरण पर अपने विचार व्यक्त किये गये। श्रीमती चंदनबाला शर्मा एवं श्रीमती सूरज डामोर का पुष्पमालाओं एवं मोती की मालाओं एवं शिल्ड देकर सम्मान भी किया गया।

शिव प्रिया मंडल की सुश्री रूकमणी वर्मा ने बताया  की इस अवसर पर महिलाओं ने फुलो एवं रंग गुलाल,अबीर से होली खेली फाग उत्सव के कार्यक्रम में  रूकमणी वर्मा, अनिला बैस, माया पंवार, कविता राठौर, निवेदिता सक्सेना,भावना टेलर, विनिता टेलर, लता चैहान, कविता चैहान, राधा, विद्या विश्वकर्मा, सीमा गेहलोद, कल्पना, करूणा, श्रीमती मालवीय, आशा, शिवानी गुप्ता, का श्रीफल एवं पुष्पमालाओं द्वारा सम्मान श्रीमती चंदनबाला शर्मा, द्वारा किया गया। शिवप्रिया महिला मंडल द्वारा मेघनगर से पधारी महिला मंडल की बहिनों का भी फुलो की माला एवं श्रीफल से सम्मान किया गया।

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