शब ए बारात का त्योहार मनाया गया सादगी से | New India Times

रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

शब ए बारात का त्योहार मनाया गया सादगी से | New India Times

शाबान का चांद नजर आने के बाद जिस दिन का बेसब्री से इंतजार रहता है वो दिन शब-ए-बारात का दिन है पूरे देश भर में शब ए बारात सादगी से मनाई गई।

मुस्लिम समाज खासा उत्साहित रहा

25 फरवरी को रतजगा जागरण की रात कुरान की तिलावत नमाज़ अदाकार सुबह सेहरी कर रोज़े का एहतमाम किया जाएगा। बडे हज़रात बच्चे महिलाओं ने रात को जागरण की ओर रोज़ा रखा।

पूरे दिन रोज़े का एहतमाम किया जायेगा। मग़रिब की अजान के बाद रोज़ा खोलने का एहतमाम किया जाएगा। मुस्लिम समुदाय में मान्यता है कि इस दिन की गई इबादत का सवाब बहुत ज्यादा होता है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक माह -ए-शाबान को बेहद पाक और मुबारक महीना माना जाता है। कहा जाता है की इस दिन की गई इबादत में इतनी ताकत होती है की वो किसी भी तरह के गुनाहों से माफी दिलाती है। दरअसल इस माह में शाबान का चांद नजर आया और 15 वी शाबान की इस्लाम धर्म के अनुयायी के लिए ये त्योहार बहुत अहम होता है।
इसे शब ए बारात या शबे बारात के नाम से भी जाना जाता है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक हर साल शब-ए-बारात शाबान महीने की 15 वीं तारीख की रात को मनाई जाती है। इस दिन शब ए बारात की खास नमाज भी पढ़ी जाती है।

गुनाहों से तौबा की रात

शब-ए बारात की रात ऐसी रात है जो सभी गुनाहों से गुनाहगार को माफी दिलाती है। इस पाक रात को जो भी सच्चे दिल से अल्लाह की इबादत करता है, उसके सामने अपने गुनाहों से तौबा करता है परवरदिगार उसे माफ कर देता है। यही वजह है कि मुस्लिम समुदाय के लोग इसके लिए खास तैयारियां करते हैं।

मुस्लिम समाज कब्रस्तान पहुंचा ओर मरहूमों के लिए इसाले सवाब किया दुआए मांगी गई

जो इस दुनिया से रुकसत हो गए हैं उनकी कब्र पर जाकर इसाले सवाब के जरिए उनको याद किया कब्रों पर दरूद फातेहा पड़ी गई  दुनिया को अलविदा कह गए अपनों के लिए मगफिरत की दुआएं पढ़ी रहमत की इस रात में अल्लाह पाक कब्र के सभी मुर्दों को आजाद कर देता है।

शब ए बारात की रात इस्लाम में 4 मुकद्दस रातों में से एक मानी जाती है

मस्जिदों और कब्रस्तानों में इस दिन मुस्लिम समाज अपने पूर्वजों को याद करने के लिए पहुंचते हैं। घरों में मीठे पकवान बनाए गये रात भर इबादत की शब ए बारात की रात इस्लाम में 4 मुकद्दस रातों में से एक मानी जाती है। पहली होती है आशूरा की रात, दूसरी शब-ए- मेराज, तीसरी शब-ए-बारात और चौथी शब-ए- कद्र की रात कही जाती है। मुस्लिम समाज ने पुरी रात इबादत की और अपने गुनाहों से तौबा की आज है रोजा।


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