मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

मध्य प्रदेश में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस आला कमान ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को अध्यक्षीय पद से हटकर उनकी जगह कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के नूर ए नज़र, कांग्रेस में दूसरी पंक्ति के नेता जीतू पटवारी को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी है। मध्य प्रदेश में कांग्रेस की हार के बाद कांग्रेस के सभी नेताओं ने हार का ठीकरा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के सिर पर फोड़ कर उन्हें ज़िम्मेदार बताया था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ पर आरोप था कि उन्होंने ऐसी (एयर कंडीशन) में बैठकर कांग्रेस चलाई है। जीरो ग्राउंड पर कोई कार्य नहीं किया है। सन 2018 और 2023 में कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाई, जिसके कारण कांग्रेस इस बार भी सत्ता से दूर रही। जबकि प्रदेश की जनता सत्ता परिवर्तन चाहती थी। लेकिन प्रदेश स्तर पर गुटों में फैली कांग्रेस पार्टी की अंदरुनी फूट, सर फुटव्वल और आपसी मतभेद के कारण और कांग्रेस के संगठित नहीं होने के कारण प्रदेश में कांग्रेस सत्ता से दूर रही। विधानसभा इलेक्शन के दौरान कांग्रेस की सरकार बनने का पूर्व अनुमान बताया जा रहा था। कांग्रेस नेतागण ने भी हार का ठीकरा कांग्रेस के प्रदेश मुखिया कमलनाथ के सर पर फोड़ा है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने आला कमान के समक्ष उपस्थित होकर खुद पद त्याग की इच्छा व्यक्त की थी। विधानसभा चुनाव 2023 के संपन्न होने के बाद चूंकि लोकसभा चुनाव होने में समय बहुत कम बचा है इसलिए यह उम्मीद की जा रही थी कि कमलनाथ ही पद पर बने रहेंगे लेकिन आज कांग्रेस कमेटी में अपने प्रेस रिलीज के माध्यम से प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुखिया को हटाकर उनके स्थान पर कांग्रेस नेता एवं राऊ के पूर्व विधायक जीतू पटवारी को मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान सौंपी है। जबकि आदिवासी नेता एवं विधायक उमंग सिंगार को विधानसभा का नेता प्रतिपक्ष और हेमंत कटारे को उप नेता प्रतिपक्ष बनाया गया है। ये नियुक्तियाँ न केवल युवा नेताओं को आगे लाने का प्रतीक हैं, बल्कि इसे मध्य प्रदेश कांग्रेस में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है।
कांग्रेस आला कमान के राष्ट्रीय नेताओं ने जीतू पटवारी पर भरोसा जताया है। उनकी नियुक्ति से कांग्रेस में नई ऊर्जा और नए विचारों की उम्मीद है। इसके अलावा, उमंग सिंगार और हेमंत कटारे जैसे युवा नेताओं की नियुक्ति से संगठन में विविधता और गतिशीलता आने की उम्मीद बताई जा रही है।
यह परिवर्तन कांग्रेस के लिए एक नई रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें युवा नेतृत्व को आगे लाकर राज्य की राजनीति में नई दिशा और गति प्रदान करने का प्रयास है। आगामी समय में इन नेताओं की कार्यशैली और उनके द्वारा लिए गए फैसले मध्य प्रदेश कांग्रेस की भविष्य की दिशा और सफलता को निर्धारित करेंगे। इन बदलावों से प्रतीत होता है कि कांग्रेस अब आक्रामक तेवर अपना कर प्रदेश में कांग्रेस संगठन को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कांग्रेस आलाकमान द्वारा प्रदेश के नेतृत्व को बदलने से लोकसभा चुनाव में अगर पार्टी के नेताओं ने संगठित होकर, और पिछली हार से सबक लेकर आगे बेहतर प्रदर्शन करती है तो कांग्रेस अपने अस्तित्व को बचाने के साथ प्रदेश में कांग्रेस टिक पाएगी। कांग्रेस नेता एवं कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सांसद राहुल गांधी ने भारत जोड़ा यात्रा के माध्यम से प्रदेश में एक अच्छा माहौल दिया था लेकिन कांग्रेस नेताओं की अंदरूनी लड़ाई और मतभेद के कारण राहुल गांधी द्वारा बनाए गए माहौल को प्रदेश कांग्रेस भूना नहीं पाई जिसके कारण कांग्रेस सत्ता से दूर हो गई लेकिन अब जिन नए और ऊर्जावान नेताओं को बदलाव की बयार में अवसर मिलने से कांग्रेस फिर स्थापित होने की ओर अग्रसर दिखाई देती है। प्रदेश कांग्रेस में हालिया बदलाव का परिणाम लोकसभा चुनाव में दिखाई दे तब ही इस बदलाव का अर्थ है।
