श्री राधाकृष्ण मन्दिर पर धुम धाम से मनाया गया श्री तुलसी जी का विवाह | New India Times

रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी/पंकज बडोला, झाबुआ (मप्र), NIT:

श्री राधाकृष्ण मन्दिर पर धुम धाम से मनाया गया श्री तुलसी जी का विवाह | New India Times

झाबुआ जिले के पेटलावद नगर के सुभाष मार्ग स्थित श्री राधाकृष्ण मंदिर पर तुलसी विवाह धूमधाम से मनाया गया।
तुलसी विवाह हुआ सम्पन्न, निकाली गई भगवान की बारात आतिशबाजी करते हुए धूमधाम से सम्पन्न हुआ।

श्री राधाकृष्ण मन्दिर पर धुम धाम से मनाया गया श्री तुलसी जी का विवाह | New India Times

प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी परम्परा अनुसार आयोजन हुआ

शुभ सयोंग

देवउठनी एकादशी के दिन नगर के सुभाष मार्ग में स्थित प्राचीन श्री राधा कृष्ण मंदिर पर सांयकाल तुलसी और विष्णु स्वरूप भगवान शालिग्राम का हिन्दू रीति रिवाजों के साथ विवाह सम्पन्न हुआ, इस अवसर पर श्रद्धालु तुलसी विवाह के साक्षी हुये।

तुलसी व भगवान शालिग्राम विवाह

महिलाओं ने तुलसी के पौधे को चुनरी व सुहाग की वस्तुएं अर्पित कर पूजा की, साथ ही शालिग्राम के साथ फेरे करवाए। मंदिर में महिलाओं ने भजन-कीर्तन कर तुलसी के पौधे की पूजा अर्चना की। पंडित जी ने तुलसी शालिग्राम का मंत्रोच्चारण के साथ सात फेरे करवाए। इस तरह शालिग्राम एवं तुलसी का पाणिग्रहण संस्कार सम्पन्न हुआ।

मंदिर के पुजारी पंडित रितेश जोशी व पियुष जोशी ने विवाह की रस्म पूर्ण करायी। ब्राह्मण स्वर्णकार समाज के आधार स्तम्भ स्व. मगनलालजी सोनी के पौत्र चित्रांश व यशवी सोनी ने भगवान शालिग्राम व तुलसी स्वरूप की भूमिका निभाई।

निकली बारात, धूमधाम से हुआ विवाह

भगवान शालिग्राम व तुलसी का बनोला निकालकर श्रद्धालु बाराती बनकर नाचते गाते नगर में आतिशबाजी करते हुए श्री राधा कृष्ण मंदिर आये, जिसमें महिलाओं की उपस्थित रही, साथ ही ढोल पर महिलाओं द्वारा नृत्य किया गया, कथा का वाचन हुआ व भगवान की आरती उतारी गई।

तुलसी विवाह की यह मान्यता

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार जिस दंपत्ति को कन्या न हो वह तुलसी विवाह संपन्न कराते हैं तो उन्हें कन्यादान का पुण्य प्राप्त होता है। इस पर्व पर महिला श्रद्धालुओं ने उपवास रखकर तुलसी विवाह का कार्य संपन्न कराया।‌‍‌
पौराणिक कथाओं के अनुसार सृष्टि कस पालनहार श्री हरि विष्णु 4 महीने के बाद निद्रा से जागे थे, मान्यता है कि इस दिन तुलसा विवाह के माध्यम से उनका आह्वान कर उन्हें जगाया जाता है और संसार का कार्यभार संभाला था, से ही मांगलिक कार्यो शुभ लग्न की शुरुआत हो गई और शादी विवाह के कार्यक्रम भी संपन्न होने लगेंगे।


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