बुरहानपुर का हरदा ग्राम आदर्श ग्राम की कल्पना का श्रेष्ठ उदाहरण है: दत्तात्रेय होसबाले (सरकार्यवाह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) | New India Times

मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

बुरहानपुर का हरदा ग्राम आदर्श ग्राम की कल्पना का श्रेष्ठ उदाहरण है: दत्तात्रेय होसबाले (सरकार्यवाह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) | New India Times

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबोले आज एक दिवसीय प्रवास पर आदर्श ग्राम हरदा पहुँचे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ लंबे समय से हरदा ग्राम में समग्र ग्राम विकास एवं स्वावलंबन को लेकर काम कर रहा हैं। जनजातीय बाहुल्य इस ग्राम में जनजाति समाज निवासरत हैं।

अपने प्रवास के दौरान श्री होसबाले जी ने कहा कि इस ग्राम ने अपनी संस्कृति, पर्यावरण, परंपराओं को सहेजने के साथ साथ नशा मुक्त होकर ग्राम को एक आदर्श ग्राम के रूप में देशभर में स्थापित किया है। हर किसी को ऐसे ग्राम के दर्शन करना चाहिए एवं और प्रत्येक ग्राम ने इसी प्रकार के आदर्श स्थापित करने के लिए प्रयास शुरू करना चाहिए।

लोक संस्कृति के किए दर्शन

सरकार्यवाह जी के ग्राम दर्शन कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण जनों ने लोक संस्कृति का प्रकटीकरण किया। ग्राम के बालकों, बालिकाओं, मातृशक्ति, युवाओं, वृद्धजन सभी ने अपने पारंपरिक उत्सवों – परंपराओं जैसे नागपंचमी, जिरोती, गोवर्धन पूजा, संझा पूजा गणगौर आदि का प्रकटीकरण कर सरकार्यवाह जी को अपनी प्राचीन और लोक मंगलकारी परम्परा से परिचित करवाया।

सरकार्यवाह दत्तात्रेय जी ने जनजातीय समाज द्वारा अच्छी वर्षा के लिये किए जाने वाले “डेडर माता” का पूजन भी किया एवं उन्हें जल चढ़ाया। उन्होंने घट्टी पर पीसकर बनाये जाने वाली पारंपरिक रसोई भी देखी जो आज भी घर घर उपयोग हो रही है।

एक आदर्श ग्राम के लिए जो भी कल्पना हो सकती है वह आदर्श ग्राम हरदा में देखी जा सकती हैं। मनोरंजन के लिए पारंपरिक लोकनृत्य हो या प्राकृतिक संरक्षण के लिए ग्राम देव का पूजन सभी अपने आप में अद्भुत हैं। वास्तव में आदर्श ग्राम हरदा उस वाक्य को सिद्ध करता हैं जहां कहा जाता हैं कि भारत आज भी गाँव में बसता हैं।

ग्राम में गौ आधारित स्वावलंबन की दिशा में भी अच्छे प्रयास हो रहे हैं। सरकार्यवाह जी ने कृषि में उपयोग होने वाले घरेलू कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी भी देखी जिसके उपयोग से ग्राम आत्मनिर्भर हो रहा हैं। ग्राम के पारंपरिक खेल का प्रदर्शन भी ग्रामीणों ने किया जो शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए आवश्यक हैं।

हरदा ग्राम में जनसहयोग से पंद्रह वर्ष पहले तालाब का निर्माण किया गया था जो आज भी खेती के लिए सहायक बना हुआ हैं। ग्राम एवं इसके आसपास के क्षेत्र में डेढ़ लाख सीताफल के पेड़ लगाए हैं जो ग्रामवासियों के रोज़गार का एक उत्तम साधन है।

गाँव का काम-राम का काम

प्रभु श्री राम जिस प्रकार से प्रजा के हित का चिंतन करते थे। आज इस ग्राम के सभी निवासी उसी भूमिका में हैं। गाँव के प्रत्येक परिवार का सुख-दुख सभी का सामूहिक सुख-दुख हैं। एवं हर परिस्थिति में एक दूसरे के सहयोग के लिए ग्रामीण तैयार रहते हैं। सबका भला करना ही धर्म का काम है इसलिए गाँव का काम वास्तव में राम का काम ही है।

सरकार्यवाह जी के आगमन की प्रसन्नता में ग्रामीणों ने सम्पूर्ण गांव को ओर अधिक सुंदर बना दिया, घरों के बाहर -मार्गो में सुंदर रंगोलियां तथा मांडने बनाए गए।
बुरहानपुर ज़िले का हरदा ग्राम आज सभी व्यसनों से दूर है और परंपराओं का संरक्षण कर रहा है। संघ की “ग्राम विकास गतिविधि” के अंतर्गत इस गांव को प्रभात गांव बनाने के वर्षों से सतत प्रयास चल रहें थे।

सरकार्यवाह जी के साथ ग्राम दर्शन में मालवा प्रांत के संघ चालक श्री प्रकाश शास्त्री एवं प्रांत के प्रांत प्रचारक श्री बलराम पटेल तथा ग्राम विकास गतिविधि के कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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