विश्व हीमोफीलिया दिवस पर जीएमसी दतिया में सीएमई का आयोजन, विशेषज्ञों ने साझा किए आधुनिक उपचार के अपडेट्स | New India Times

गुलशन परूथी, ब्यूरो चीफ दतिया (मप्र), NIT:

विश्व हीमोफीलिया दिवस पर जीएमसी दतिया में सीएमई का आयोजन, विशेषज्ञों ने साझा किए आधुनिक उपचार के अपडेट्स | New India Times

विश्व हीमोफीलिया दिवस (17 अप्रैल) के अवसर पर शासकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी), दतिया में पैथोलॉजी विभाग द्वारा माइक्रोबायोलॉजी एवं बायोकैमिस्ट्री विभाग के सहयोग से “हीमोफीलिया अपडेट्स 2026: डायग्नोसिस टू मैनेजमेंट” विषय पर एक दिवसीय सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक डायरेक्टर ऑफ मेडिकल एजुकेशन डॉ. अरुणा कुमार एवं संरक्षक डीन व सीईओ डॉ. दीपक सिंह मरावी रहे। सह-संरक्षक के रूप में पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अर्जुन सिंह का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। सलाहकार मंडल में डॉ. किरण त्रिपाठी (माइक्रोबायोलॉजी) एवं डॉ. अभिषेक शर्मा (बायोकैमिस्ट्री) शामिल रहे।
आयोजन की जिम्मेदारी आयोजन अध्यक्ष डॉ. आनंद भदकारिया, सह-अध्यक्ष डॉ. अभिषेक मेहता, आयोजन सचिव डॉ. मीनू बाकना एवं वैज्ञानिक सचिव डॉ. कमल कछावा ने संभाली। सह-सचिव के रूप में डॉ. निधि शर्मा, डॉ. रज्जू तिवारी, डॉ. आभा गुप्ता, डॉ. वंदना पहाड़िया एवं डॉ. स्वाति श्रीवास्तव का विशेष योगदान रहा।
सीएमई में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए। प्रमुख वक्ताओं में डॉ. वी.के. भारद्वाज (पूर्व विभागाध्यक्ष, गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल), डॉ. दीपक सिंह मरावी, डॉ. ज्योति प्रियदर्शिनी (जी.आर. मेडिकल कॉलेज ग्वालियर), डॉ. पल्लवी अग्रवाल (एम.एल.बी. मेडिकल कॉलेज झांसी), डॉ. रवि अम्बे (पीडियाट्रिक्स, जी.आर. मेडिकल कॉलेज ग्वालियर), डॉ. अपराजिता तोमर (एसआरवीएस मेडिकल कॉलेज शिवपुरी), डॉ. विदुषी सचदेवा, डॉ. कोमल कपूर एवं डॉ. छाया शेवड़ा शामिल रहे।
कार्यक्रम के दौरान हीमोफीलिया के निदान, प्रयोगशाला जांच, संभावित जटिलताओं एवं आधुनिक उपचार पद्धतियों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस अवसर पर फैकल्टी मेंबर्स, सीनियर एवं जूनियर रेजिडेंट्स, इंटर्न्स, पैरामेडिकल स्टाफ एवं लैब टेक्नीशियनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
अंत में प्रश्नोत्तर सत्र एवं वैलिडिक्टरी सेशन आयोजित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से हीमोफीलिया के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ समय पर निदान एवं प्रभावी प्रबंधन के महत्व पर विशेष जोर दिया गया।

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