रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

दीपावली पर नए नोट प्राप्त करने पहुंचे सैकड़ों ग्राहकों को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) मेघनगर शाखा में भेदभाव और मनमानी का सामना करना पड़ा। ग्राहक बैंक प्रबंधन पर ‘खास लोगों’ को प्राथमिकता देने और आम ग्राहकों के साथ उपेक्षा का आरोप लगा रहे हैं। नए नोटों की जानकारी सामने आते ही बैंक के बाहर लंबी कतारें लग गईं। लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी आम ग्राहकों को मात्र 1000 से 2000 रुपए तक ही नए नोट दिए जा रहे थे, जबकि कुछ प्रभावशाली लोग बड़ी मात्रा में नए नोट लेकर बाहर निकलते देखे गए।
ग्राहकों ने आरोप लगाया कि बैंक में पारदर्शिता पूरी तरह नदारद रही और नियम लगातार बदलते गए। पहले कहा गया कि केवल खाता धारकों को ही नोट दिए जाएंगे, फिर कहा गया कि केवल 1000 रुपए तक ही नोट दिए जाएंगे और बाद में चेक के पीछे बैंक मैनेजर की सिफारिश लिखवाना जरूरी बताया गया।
ग्राहक निमिष जैन ने बताया: “जब हमने नए नोट मांगे तो बैंक मैनेजर ने हमें खाता बंद कराने की धमकी दी। यह पूरी तरह गलत है। हम सुबह से लाइन में खड़े हैं और नियम बार-बार बदल दिए जाते हैं। जबकि कुछ लोग सीधे अंदर जाकर बड़ी रकम के नए नोट ले जा रहे हैं।”
एक अन्य ग्राहक तरुण पाटीदार ने कहा: “यह स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार है। सबका पैसा बैंक में बराबर है, फिर सुविधा सिर्फ चुनिंदा लोगों को क्यों? यह ‘मुँह देखकर नोट बांटना’ है।” इस संबंध में शाखा प्रबंधक दीप्ति चन्द्रवंशी ने कहा कि नोट वितरण खाताधारकों के आधार पर किया जा रहा है और कैशियर को उनके द्वारा चेक पर लिखे निर्देशों के अनुसार नोट देने को कहा गया है।
हालांकि, शाखा में आई कुल नई मुद्रा की जानकारी को उन्होंने गोपनीय बताते हुए साझा करने से मना कर दिया। समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष कलसिंह मचार ने कहा: “बैंक के सूचना बोर्ड पर शिकायत के लिए उच्च अधिकारियों के संपर्क नंबर नहीं लगाए गए हैं, जो नियमों का उल्लंघन है।
इस पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।” ग्राहकों ने चेतावनी दी है कि वे इस मुद्दे को उच्च प्रशासन तक लेकर जाएंगे और औपचारिक शिकायत दर्ज कराएंगे। Mm

