मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

मध्यप्रदेश के रतलाम ज़िले की दो सगी बहनें, जिन्होंने मानव सेवा को अपना मिशन बनाया हुआ है, बच्चों को दीनी तालीम देकर बेहतर इंसान बनने की सीख देने के साथ-साथ इंसानी ख़िदमत में भी सदा अग्रणी रहने वाली इन दोनों बहनों के कारनामों पर कौम को फ़ख्र है। रतलाम शहर का हर वाशिंदा इनकी इज़्ज़त करता है, इनका एज़ाज़ व इकराम करता है।
84 साल की शहज़ादी बेगम, अपने नाम के मुताबिक ही शहज़ादी हैं, उन्हें सेवा की शहज़ादी के लक़ब से भी नवाज़ा जा चुका है। सरकारी सेवा से रिटायरमेंट के बाद शहज़ादी बेगम लोगों की ख़िदमत के मिशन में ऐसी जुटीं कि आज भी यह सिलसिला बदस्तूर जारी है। रिटायर्ड नर्स शहज़ादी बेगम, असहाय और बीमार लोगों की सुश्रुषा के लिए आड़े वक्त में हमेशा मददगार बनकर सामने आती हैं। उनकी ऐसे वक्त मौजूदगी ही ज़रूरतमंदों के लिये अल्लाह की गैबी मदद का एहसास दिलाती हैं।किसी भी मज़हब के मानने वाले हों, शहज़ादी बेगम की बेलौस ख़िदमत(निस्वार्थ सेवा) का हर कोई लोहा मानता है। खामोश ख़िदमत में लगी रहने वाली शहज़ादी बेगम को सरकारी/गैर सरकारी तंज़ीमें उनके सम्मान में स्टेज पर बुलाकर उनका एज़ाज़ कर ही देती हैं। सेवा की इस प्रतिमूर्ति को न जाने कितनी बार सम्मानों से नवाज़ा जा चुका है,उन्हें खुद भी पता नही। मानव सेवा की इस मदर टेरेसा को लोगों की दुआएँ उनके लिये बड़ा इनआम हैं।
वहीं साल 2005 में तालीम महकमे से रिटायर हुई 79 साला सैय्यदा बिल्किस, शहज़ादी बेगम की बहन हैं। इस नारी शक्ति ने नौकरी में रहते हुए भी और रिटायरमेंट के बाद आज तक मुसलसल तालीम (शिक्षा) को फ़रोग़ (प्रोत्साहित) करने का अपना मशगला (हॉबी) जारी रखा हुआ है। दो बार हज की सआदत हासिल कर चुकीं इस नारी शक्ति सैय्यदा बिल्किस साहिबा अपने घर में लंबे समय से दो शिफ्ट में निशुल्क मदरसा चलाती हैं, जिनमें बच्चों से लेकर बड़ों तक धार्मिक ग्रंथ कुरआन सीखने आते हैं।जिससे हज़ारों लोग फैज़याब (लाभान्वित) हो चुके हैं। बच्चों को तहज़ीब (संस्कार) का पाठ पढ़ाकर अच्छा इंसान बनने की तालीम दी जाती है, इसके अलावा भी ख़िदमत के बहुत से शोबों(फैकल्टी) में आपकी ख़िदमत जारी रहती है। आपकी भी कितनी बार इज़्ज़त अफ़ज़ाई हो चुकी है इसकी कोई गिनती नही और गिनती करना भी नही चाहतीं क्योंकि आपकी जानिब से की जा रही ख़िदमत से बढ़कर कुछ नही। सिर्फ लोगों की मोहब्बतें हैं जो कहीं न कहीं आपका एज़ाज़ कर खुश हो जाते हैं और उसके पीछे मकसद यही होता है कि आने वाली नस्लें आपके नक्शे कदम पर चलें ताकि हर दौर में अपनी सलाहियतों से लोग कौम को फायदा पहुँचाते रहें। दोनों महिला शक्ति की सेवाओं को जनता के सामने लाने का उद्देश्य है कि जनमानस को निशुल्क सेवाएं उपलब्ध कराना एक बहुत कठिन काम है दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि यह काम लोहे के चने चबाना के बराबर है। हम अल्लाह से दुआ करते हैं कि मोहतरमा शहज़ादी बेगम और मोहतरमा सैय्यदा बिल्किस साहिबा की सेवाओं को अल्लाह कुबूल करें। दोनों को अल्लाह लंबी उम्र दे, इन का साया हमेशा हमारे सरों पर बना रहे। इनकी कोशिशों और ख़िदमत के तुफैल कौम के नौनिहालों का मुस्तक़बिल रौशन (भविष्य उज्जवल) हो। हमारे बच्चे बेहतर नतीजे देकर राष्ट्र के कर्णधार बने और उनमें भी सेवा की ऐसी भावना हो।
