संदीप शुक्ला, ब्यूरो चीफ, ग्वालियर (मप्र), NIT:

तानसेन समारोह में रविवार की प्रातःकालीन सभा में आखिरी कलाकार के रूप में मायानगरी मुबंई से आए श्री देवानन्द यादव का ध्रुपद गायन हुआ। उन्होंने ग्वालियर को ध्रुपद नगरी की संज्ञा देकर नमन किया और सुर सम्राट तानसेन के आँगन में सुमधुर ध्रुपद गायन किया। उन्होंने अपने गायन के लिए राग मधुवंती चुना। इस राग में देवानन्द जी ने अपनी खनकदार आवाज में विलंबित एवं मध्यलय आलाप किया। इसके बाद तीव्रा ताल में बंदिश जग वंदन गौरी नंदन का सुमधुर गायन किया। शास्त्रीय संगीत की गायकी के साथ देवानन्द जी को उप शास्त्रीय संगीत ठुमरी व टप्पा गायन में भी महारथ हासिल है। तानसेन समारोह में उनके ध्रुपद गायन में वरिष्ठ पखावज वादक श्री संजय पंत आगले ने बेहतरीन संगत की, नाई वादन किया। उन्होंने अपने सारंगी वादन में आलापचारी और एक ताल में विलंबित गत से सुरीली धुन निकाली। इसके बाद राग शुद्ध सारंग में ही तीन ताल मध्य लय एवं द्रुत में गत प्रस्तुत की। दोनों भाइयों ने ठुमरी की सुरीली धुन निकालकर अपने सारंगी वादन का समापन किया। तबले पर उस्ताद हनीफ खां एवं शाहरुख खां ने कमाल की संगत कर सारंगी की जुगलबंदी में चार चाँद लगा दिए।
