अंकित तिवारी, ब्यूरो चीफ, प्रयागराज (यूपी), NIT:

गऊघाट क्षेत्र में रेलवे भूमि पर दशकों से बसी गरीब बस्तियों को हटाने के लिए की गई बुलडोजर कार्रवाई का भाकपा (माले) ने कड़ा विरोध जताया है। पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने मौके का दौरा कर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और घटना की निंदा करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी।
प्रतिनिधिमंडल में राज्य कमेटी सदस्य व जिला प्रभारी सुनील मौर्य, मनीष कुमार तथा इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाईए) की प्रदेश उपाध्यक्ष राधा शामिल रहीं। टीम ने आरोप लगाया कि देर रात पुलिस बल के साथ बस्तियों को उजाड़ा गया और इस दौरान महिलाओं व पुरुषों के साथ बल प्रयोग किया गया।
भाकपा (माले) नेताओं ने कहा कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए गरीबों को बेघर करना अमानवीय है। उन्होंने मांग की कि प्रभावित परिवारों को पहले आवास, रोजगार और बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए, उसके बाद ही कोई कार्रवाई की जाए।

सुनील मौर्य ने कहा कि “देश में विकास के नाम पर गरीबों को उजाड़ा जा रहा है। न्यायालयों के दिशा-निर्देशों की अनदेखी कर लोगों को बेघर करना उनके मूल अधिकारों का हनन है।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो इसे प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप दिया जाएगा।
मनीष कुमार ने कहा कि यह कोई एकल घटना नहीं है, बल्कि प्रयागराज के कई हिस्सों में गरीबों को हटाने की कार्रवाई जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध करने वालों पर पुलिसिया कार्रवाई और मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।
वहीं, राधा ने महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार की निंदा करते हुए कहा कि “एक ओर महिला सम्मान की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर रात में महिलाओं के साथ बल प्रयोग किया जाता है, जो मानवाधिकारों का उल्लंघन है।” उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर प्रदेशभर में आंदोलन चलाया जाएगा।
भाकपा (माले) ने स्पष्ट किया कि जब तक प्रभावित परिवारों को पुनर्वास नहीं दिया जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

