नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

जनवरी 2024 में महाराष्ट्र सरकार द्वारा जनरल और मराठा समाज के वर्तमान हालात की सटीक जानकारी जुटाने के लिए एक पिछड़े आयोग का गठन किया गया। आयोग ने हज़ारों सरकारी तथा स्कूली शिक्षकों को बतौर सर्वेयर नियुक्त किया। आयोग ने तय किया कि प्रत्येक टीचर को 10 हज़ार रुपए मानदेय दिया जाएगा।

दो साल बीतने के बाद एक रुपया अदा नहीं किया जा सका है। पेशे से टीचर भारत रेशवाल ने मामले को लेकर राजस्व विभाग में सूचना अधिकार की अर्जी दायर की। जवाब में भारत को जवाब नहीं मिला , अभी तो अपील में जाना पड़ा।
भारत ने बताया कि आयोग ने सर्वे के काम में कई बदलाव किए। शिक्षकों ने आदेश के अनुसार सर्वे का काम ईमानदारी से पूरा कर आयोग को सौंपा। मानदेय देने की बात आई तब काम और मानदेय की रकम में घोर असंतुलन नज़र आया जिसके चलते शिक्षकों ने मानदेय स्वीकार नहीं किया। तब से लेकर अब तक शिक्षकों को मानदेय नहीं दिया गया है। भारत ने RTI में अर्जी दे कर मानदेय रकम की स्थिति जानना चाही। सूचना अधिकारी ने जवाब में जवाब नहीं दे कर अपील में जाने का रास्ता प्रशस्त किया।
सूत्रों से बताया जा रहा है कि मानदेय के लिए जो फंड आया था उसमे से प्रशासन ने सरकार को कुछ वापिस किया है जब कि बड़ी रकम का गबन कर लिया गया है। इस प्रकरण में जिलाधिकारी द्वारा तत्काल जांच की मांग की जा रही है।

