नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए 27 भारतीय नागरिकों की मौत के बाद नरेन्द्र मोदी सरकार ने सुरक्षा में चूक की बात मान ली है। धर्म पूछा फिर गोली मारी जैसी नफ़रत फैलाने वाली लाइन पर पसीना बहाने वाला गोदी मीडिया का तंत्र इस बार बुरी तरह से फेल हो गया है। अदानी अंबानी के चैनलों में राजनाथ सिंह और अमित शाह के इस्तीफ़े की मांग को कोई जगह नहीं मिल रही है। पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया जाना चाहिए इस मांग को लेकर कांग्रेस समेत सारा विपक्ष और देश केंद्र सरकार के साथ खड़ा है।

पहलगाम पहुंचे नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा जो कुछ हुआ उसके पीछे समाज को विभाजित करने का विचार है, भाई को भाई से लड़ाने की साज़िश है ऐसे में यह जरूरी है कि हर भारतीय एकजुट होकर आतंकवादियों की नापाक कोशिश को विफल करे। ज्ञात हो कि देश भर में हिंदूवादी संगठन सड़क पर उतरकर भारतियों को दुकाने बंद रखने का आह्वान कर रहे हैं। आंदोलन में सनातन धर्म के बजाये सकल हिन्दू समाज के बैनर को आगे किया गया है। राइट विंग प्रभावित इन आंदोलनों को सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। भारतीय होने के नाते लोग स्वयंस्फूर्ति से बंद के आयोजनों में शरिक हो रहे हैं।
पीएम नरेंद्र मोदी बिहार के मधुबनी में बीजेपी की चुनाव प्रचार रैली के संबोधन में पहलगाम हमले का जिक्र कर सवालों के जवाब देने के बजाये बचकर निकल गए। पीड़ितों को मदद करने के लिए सरकारी खर्चे पर महाराष्ट्र से सूट बूट कोट पहनकर कश्मीर गए मंत्री आपदा में अवसर खोजने के मोह से खुद को बचा नहीं पाए। आतंकी हमले में मारे गए मृतकों के परिजन और जनता बीजेपी के मंत्रियों को घेर घेर कर सरकार की नाकामी पर सवाल पूछ रही है। पुलवामा के बाद यह दूसरा बड़ा आतंकी हमला है इस बार मोदी जी अरब देशों के दौरे पर थे। केंद्र सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कुछ कड़े कदम जरूर उठाए हैं। टैरिफ वॉर के कारण भारत वाणिज्य स्तर पर अमरीका और चीन के बीच संतुलन बनाने में व्यस्त है।

वकील संघ ने किया निषेध: जामनेर तालुका वकील संघ ने पहलगाम आतंकी हमले के विरोध में निषेध प्रस्ताव पारित कर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा है। भारत सरकार से मांग की गई है कि आतंक के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करें।
