नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

केंद्र सरकार ने बजट 2025-26 पेश कर दिया है। 50 लाख 65 हज़ार करोड़ रुपए के बजट से 196 लाख करोड़ रुपए ऋण के लिए साल का 12 लाख 76 हज़ार करोड़ ब्याज देना होगा। GST अन्य Taxes से आम जनता को कोई राहत नहीं नतीजा महंगाई और बढ़ेगी। A 1, A2 समेत 22 पूंजीवादियों पर लगने वाले कार्पोरेट टैक्स में 1% का भी इज़ाफ़ा नहीं किया गया। महाराष्ट्र सरकार के बजट के ठीक पहले महाराष्ट्र बिल्डर संगठन ने युति सरकार के करप्ट बहीखाते से तंग आकर चार फ़रवरी से महाराष्ट्र की विकास यात्रा को रोकने की घोषणा की है। राज्य सरकार पर ठेकेदारों का एक लाख करोड़ रुपया बकाया है। PWD 46,000, जलजीवन मिशन 18,000, ग्राम विकास 11,000, जलसंपदा 2,000 करोड़ रुपया छोटा मोटा 1500। चार लाख ठेकेदारों पर निर्भर एक करोड़ असंगठित मजदूरों के परिवार महंगाई का सामना करते हुए आर्थिक तंगी में गुजर बसर कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक परिषद मे भारतीय कंपनियों से करार कर विदेशी निवेश का फट चुका ढोल पीट रहे है। अपने निर्वाचन क्षेत्रों में रोजगार देने में नाकाम मंत्री चंद बच्चों को जर्मनी भेजने का ड्रामा चुनाव के बाद बंद कर चुके है। महाराष्ट्र सरकार पर 8 लाख 10 हजार करोड़ रुपए का कर्ज़ है। वित्तीय घाटा एक लाख करोड़ से अधिक हो चुका है। महाराष्ट्र में राजनीतिक पूंजीवाद बेहद तेजी से पनप रहा है। सत्ताकांक्षी बीजेपी ने राष्ट्र-महाराष्ट्र की अर्थ व्यवस्था चौपट कर दी है। धर्म-काम-अर्थ-मोक्ष इन चार तत्वों में काम और अर्थ का जनता के भौतिक जीवन पर सीधा असर होता है। राजसत्ता ने धर्म और मोक्ष को हथियार बनाकर समाज को अर्थ से वंचित कर उसकी अभीप्साओं को रौंद डाला है।
