पवन परुथी, भोपाल/ग्वालियर (मप्र), NIT:

मध्यप्रदेश शासन के गृह विभाग द्वारा वर्ष 1985 से 2010 तक पत्रकारों की सुरक्षा के लिए आदेश जारी किए गए हैं। परन्तु पुलिस विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के द्वारा उक्त आदेश पर अमल नहीं किया जाता है। यह बात एम पी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के प्रांतीय अध्यक्ष राधावल्लभ शारदा ने कही।
श्री शारदा का मानना है कि मध्यप्रदेश शासन के गृह विभाग के आदेश का पालन होता है तो फिर पत्रकार सुरक्षा कानून की आवश्यकता नहीं है। इस आदेश में कुछ संशोधन की आवश्यकता है। संचालक जनसंपर्क एवं पुलिस महानिदेशक के स्थान पर जिला जनसंपर्क अधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक तक सीमित करना चाहिए। इस आदेश से स्पष्ट है कि आर एन आई में पंजीकृत समाचार पत्र एवं चैनल के संवाददाता पर किसी की शिकायत पर सबसे पहले धारा 154 के तहत प्राथमिकी दर्ज की जा कर प्रकरण की जांच पुलिस अधीक्षक अथवा डी आई जी के द्वारा की जाने के बाद यदि शिकायत सही पाई जाती है तो फिर अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।
राधावल्लभ शारदा ने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री को इस आदेश में कुछ संशोधन के साथ पत्र लिखा है जिसमें यह मांग की गई है कि पीड़ित पत्रकार को भोपाल जनसंपर्क के संचालक के स्थान पर जिला जनसंपर्क अधिकारी एवं पुलिस महानिदेशक के स्थान पर जिला पुलिस अधीक्षक तक अपनी बात रखने का प्रावधान किया जाना चाहिए। देखने में आया है कि पत्रकार पर एफआईआर दर्ज करने से पूर्व पुलिस विभाग द्वारा जिला जनसंपर्क अधिकारी से जानकारी ली जाती है कि पीड़ित पत्रकार पत्रकार हैं या नहीं इस बात का उत्तर जिला जनसंपर्क अधिकारी देता है कि यह अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार नहीं है।
