मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

दुष्कर्म के मामले में फंसे और लंबे समय से क़ानूनी लड़ाई की पेचीदगियां झेल रहे नगर के दो नामचीन नागरिक सर्वश्री पूर्व पार्षद कलीम पहलवान कुरैशी एवं कांग्रेसी नेता महमूद अंसारी को अंतत: दिनांक 12 अगस्त 2022 को सुप्रीम कोर्ट से सशर्त ज़मानत मिल गई है। बुरहानपुर के सीनियर एडवोकेट मनोज कुमार अग्रवाल, जो इस मामले में पीड़िता की ओर से सुप्रीम कोर्ट में भी पैरवी कर रहे हैं ने बताया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के पश्चात धारा 376 के इन दोनों आरोपी गण सर्वश्री कलीम पहलवान और महमूद अंसारी को सशर्त ज़मानत मंज़ूर की है।

उल्लेखनीय है कि दोनों ही आरोपीगण सर्वश्री कलीम पहलवान और महमूद अंसारी की पूर्व में सेशन कोर्ट बुरहानपुर और हाईकोर्ट जबलपुर से अग्रिम ज़मानत आवेदन खारिज होने के पश्चात दोनों ही आरोपीगण सर्वश्री कलीम पहलवान और महमूद अंसारी ने मा. सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम ज़मानत के लिए याचिकाएं लगाई थी। इन याचिकाओं में पूर्व में मा. सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए अंतिम निर्णय तक दोनों आरोपीगण को गिरफ्तार नहीं किए जाने का आदेश किया था, जिसके पश्चात दुष्कर्म की पीड़िता की ओर से बुरहानपुर के सीनियर एडवोकेट मनोज कुमार अग्रवाल ने मा. सुप्रीम कोर्ट में आरोपीगण सर्वश्री कलीम पहलवान और महमूद अंसारी को ज़मानत दिए जाने का विरोध किया था, किंतु आरोपीगण की ओर से सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी द्वारा विगत लगातार चार तिथियों से आरोपीगण को ज़मानत दिए जाने की दलील देने के बाद 12 अगस्त 2022 को याचिकाओं का अंतिम रूप से निपटारा करते हुए मा. सुप्रीम कोर्ट ने दोनों ही आरोपीगण सर्वश्री कलीम पहलवान और महमूद अंसारी की अग्रिम ज़मानत की याचिका मंज़ूर करते हुए उन्हें सशर्त ज़मानत पर छोड़े जाने के आदेश पारित किए हैं। मा. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि वे इस मामले के गुण अथवा दोषों पर अपना कोई भी मत व्यक्त नहीं कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि नगर के एक मेडिकल दुकान संचालक की पीड़िता धर्मपत्नी ने दोनों आरोपीगण सर्वश्री कलीम पहलवान और महमूद अंसारी के विरुद्ध दुष्कर्म का आरोप लगाया था जिसमें थाना कोतवाली बुरहानपुर ने सर्वश्री कलीम पहलवान और महमूद अंसारी के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया था। दोनों आरोपी सर्वश्री कलीम पहलवान और महमूद अंसारी लंबे समय से अपनी ज़मानत के प्रयास कर रहे हैं जिसमें माननीय सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सशर्त ज़मानत दी है।
