वालिदैन (माता-पिता) अगर नाराज़ हैं तो ख़ुदा भी नाराज़ है: मौलाना अल्लामा मुशीर रज़ा बरकाती | New India Times

मुबारक अली, ब्यूरो चीफ, शाहजहांपुर (यूपी), NIT:

वालिदैन (माता-पिता) अगर नाराज़ हैं तो ख़ुदा भी नाराज़ है: मौलाना अल्लामा मुशीर रज़ा बरकाती | New India Times

सुरत ए हाल में आये दिन यही खबर आती है कि आज लड़के ने अपने बूढ़ी मां बाप को घर से निकाल दिया या औलाद ने मां को मारा, कभी कभी दिल दहला देने वाली खबर मिलती है कि औलाद ने अपने वालिदैन को बड़ी बेरहमी से क़त्ल कर दिया। इस भयानक बुराई को मिटाने के लिए सोसायटी ने जश्न ए वालिदैन का प्रोग्राम रखा।

बड़ी ही बेहतरीन तरीके से अल मुश्किल कुशा इत्तेहादुल मुस्लिमीन नेशनल तहरीक व ख़ानक़ाह की जानिब से ईमान ए बेदारी मुहिम मीटिंग-आल इंडिया मिशन के तहत मुहल्ला बाडू ज़ई अव्वल में शेख़ मौलाना शाही की सदारत व सरपरस्ती में जश्न ए वालिदैन प्रोग्राम किया गया। इस प्रोग्राम का मैन मक़सद महज़ यही था कि औलादें अपने वालिदैन की अज़मत को समझें, उनके मर्तबा को समझें और उनकी खिदमत करें। आपको बता दूं कि इस प्रोग्राम में एक रस्म की अदायगी की गई जो आज तक किसी प्रोग्राम में आपको देखने को नहीं मिली होगी सोसायटी ने पहली बार ये पहल की है और आगे भी जारी रहेगी। औलादों ने अपने वालिदैन को बैठाकर उनके पैरों को धुला और बोसा लिया। तोहफे नवाजी़ की अपने वालिदैन को गुलपोशी करके मुआफी तलब करके उन्हें ख़ुश किया। इस मंज़र को देखकर सभी जायरीनों की आंखों में आसूं आ गये और संजीदा होकर औलादें अपने वालिदैन के क़दमों में गिर कर सिसक सिसक कर मुआफी मांगने लगीं। औलादों के अमल को देखकर वालिदैन के दिल बाग़ बाग़ हो गये। प्रोग्राम में शिरकत करने वालों ने ये ख्वाहिश की,कि ऐसे प्रोग्राम हर शहर में होने की सख्त ज़रूरत है और ऐसे प्रोग्राम्स में सभी को बढ़चढ़ कर हिस्सा लेने की जरूरत है। शेख मौलाना शाही ने कहा कि आज हमारी क़ौम में सबसे ज्यादा अगर नाफरमानी हो रही है तो वह वालिदैन की है ।वालिदैन की नाफरमानी औलादों की ज़िन्दगी में तबाही लाती है। वो औलाद कहीं और कभी भी सुकून नहीं पा सकतीं जिन्होंने अपने वालिदैन का दिल दुखाया है। मां बाप की बगैर दुआओं के कोई भी मंज़िल नहीं पा सकता।

मां बाप उनके सामने ऊंची आवाज़ में बात न करना, उनके फैसलों में दख़ल अंदा़जी़ न डालना, उनसे हुज्जत न करना ये सारे अमल सुन्नत ए रसूल हैं। ऐसे अमल से हमारे वालिदैन भी खुश हमारा रब भी खुश, हमारे नबी भी खुश।और हमारी ज़िन्दगी आखिरत भी बेहतर और आला होगी। शायर ए इस्लाम जनाब क़ारी अली अहमद महमदापुरी ने वालिदैन की शान में नात ए मनकबत पेश की।

ग्वालियर से आये मेहमान खुसूसी मौलाना अल्लामा मुशीर रज़ा बरकाती ने कुरानो अहदीस की रोशनी में कहा कि अगर मुसलमान अपनी ज़िंदगी और आखिरत संभालना चाहते हैं तो अपने वालिदैन की खिदमत करें और उनको खुश और राज़ी रखें। मां बाप की बगैर इजाजत के जन्नत नहीं मिलने वाली चाहें सिर के बालों बराबर नेकियां क्यूं न हों।

प्रोग्राम में निज़ामत हाफ़िज़ क़ासिम अख़्तर वारसी,नात ख्वां- मो.आलम, अब्दुल कादिर (कोरो कुइयां), रेहान क़ादरी,अनस रज़ा,मो. कामरान,
इंतजामिया टीम- में मो. साजिद,मो. वाजिद, सलमान, नौशाद अंसारी, मो. सिकंदर, सय्यद इमरान, मंसूर खां, नौशाद अंसारी, सैकड़ों जायरीन और तमाम मेम्बर्स शामिल रहे।

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