प्रशासनिक फ़ाइलों में अटका हुआ है दवाईयों का स्टाक: उप जिला चिकित्सालय जामनेर के डाॅक्टर व अधिकारी हतप्रभ, चाह कर भी मरीजों का सही इलाज नहीं कर पा रहे हैं डाॅक्टर | New India Times

नरेन्द्र इंगले, जामनेर /जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

प्रशासनिक फ़ाइलों में अटका हुआ है दवाईयों का स्टाक: उप जिला चिकित्सालय जामनेर के डाॅक्टर व अधिकारी हतप्रभ, चाह कर भी मरीजों का सही इलाज नहीं कर पा रहे हैं डाॅक्टर | New India Times

जामनेर का उपजिला अस्पताल एक ऐसी अदभुद अस्पताल बन चुका है जहाँ चिकित्सा से संबंधित सैकड़ों समस्याएं नया रुप धारण करती रहती हैं। कभी बिगडी सोनोग्राफी, एक्स रे मशीन कि तकनिकी मरम्मत का काम हो या फ़िर नेताओ के राजनितीक स्टंटबाजी के लिए डाक्टरों की गैरमौजूदगी पर काटा गया बवाल हो। इस बार सिवील में दवाईयों का खत्म हो चुका स्टाक मरीजों और स्थानीय परामर्शदाताओं के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। सिवील में बीते एक महिने से खांसी कि दवा समेत अन्य संसाधनों तथा औषधीयों की भारी किल्लत सता रही है। ओपीडी में तैनात सेवाकर्मी डाक्टर मरीजों को वही दवाईयां देने के लिए मजबुर हैं जो फिल्हाल स्टाक में प्रचुर मात्रा में है। शहर में चल रहे अविस्मरनीय बुनीयादी विकास कार्यों के चलते वातावरण में घुलती धूल मिट्टी से सर्दी-सुकाम, बुखार के प्राथमीक लक्षण इंसानी शरीर में सफ़ेद कोशिकाओं को प्रभावीत कर डेन्गू जैसे बीमारियों को निमंत्रण दे रहे हैं जिसके चलते व्हायरल बिमारियों की चपेट में आने से आम लोग काफी त्रस्त हैं। सरकारी अस्पताल में वाजिब और शाश्वत इलाज के हिमायती मरीजों की प्रतिदिन की ओपीडी करीब एक हजार तक रहती है, ऐसे में पर्याप्त आवश्यक दवाईयां ही स्टाक में नहीं हैं। मामले पर स्थानीय शीर्ष परामर्शदाता डाॉ विनय सोनवने से सहयोगी पत्रकार राहुल ने जानकारी ली तो डाॅ सोनवने ने बताया कि दवाईयों के लिए जिला अस्पताल को पत्राचार किया गया है लेकिन अब तक स्टाक उपलब्ध नहीं हो सका है।

विदीत हो कि स्थानीय प्रशासन हर बार अपनी ओर से जिला प्रशासन को पत्राचार करता है लेकिन जिलास्तर से कार्यवाही में काफी लेटलतीफी बरती जाती है, फ़िर जब मामला मीडिया में आता है तो ही कुछ हो पाता है, बस यही खेल चल रहा है। सिवील के जरुरतों पर कोई नेता फ़िर वह चाहे सत्ता में हो या विपक्ष में वह कुछ भी कहने बोलने के लिए तैय्यार नही है। सिस्टम के ढुलमुल रवैय्ये के बीच पिसते लोकतंत्र का शायद इससे बडा व्यंगात्मक गौरव नहीं हो सकता। वहीं मीडिया के जरीये ही जन शिकायतों को उजागर करने का काम कई वर्षों से निरंतर चला आ रहा है। इन सभी के बीच एक बात संतोषजनक है कि सिवील का स्थानीय प्रशासन अपने कर्तव्यों के प्रति बेहद संवेदनशील और इमानदार है। बहरहाल दवाईयों की किल्लत से जूझ रहे मरीजों से माननीय हुजूर से यही अनुरोध किया जा रहा है कि जिला प्रशासन कि ओर से तत्काल सुचिबद्ध प्रचुर दवाईयों की आपूर्ति कि जाए।

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