तारिक़ खान, ब्यूरो चीफ, रायसेन (मप्र), NIT:

रायसेन जिले में नवागत कलेक्टर रोहित सिसोनिया के पदभार संभालने के बाद प्रशासनिक कामकाज में तेज़ी देखने को मिल रही है। उनकी सक्रिय कार्यशैली का असर अब कलेक्ट्रेट से लेकर जिले के विभिन्न सरकारी विभागों तक दिखाई देने लगा है। अधिकारियों और कर्मचारियों में कामकाज को लेकर सक्रियता बढ़ी है। कहीं विभागीय निरीक्षण किए जा रहे हैं तो कहीं लंबे समय से लंबित फाइलों और शिकायतों के निराकरण की प्रक्रिया तेज़ हो गई है।
कलेक्टर की कार्यशैली का विशेष असर जनसुनवाई में देखने को मिल रहा है। अपनी समस्याएं लेकर पहुंचने वाले आवेदकों की शिकायतों को गंभीरता से सुना जा रहा है। कई मामलों में मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जा रहे हैं। कलेक्टर केवल आवेदन लेकर औपचारिकता पूरी करने के बजाये समस्याओं के वास्तविक समाधान पर जोर देते नज़र आ रहे हैं।
जनसुनवाई के दौरान जरूरतमंद और बीमार लोगों की परेशानियों को संवेदनशीलता से सुनना तथा स्वयं आगे आकर उनकी मदद के लिए पहल करना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। इससे आम नागरिकों में प्रशासन के प्रति भरोसा बढ़ने और अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद जगी है।
कलेक्टर के लगातार निरीक्षण और कार्रवाई के निर्देशों का असर विभिन्न विभागों में भी दिखाई देने लगा है। अधिकारियों और कर्मचारियों को लंबित प्रकरणों, जनशिकायतों और आम लोगों से जुड़ी समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देना पड़ रहा है। सरकारी दफ्तरों में कामकाज की रफ्तार बढ़ने के साथ ही प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर भी हलचल नज़र आने लगी है।
हालांकि, प्रशासन की इस सक्रियता की वास्तविक परीक्षा इसे लगातार बनाए रखने और वर्षों से लंबित जनसमस्याओं का स्थायी समाधान करने में होगी। जनता को उम्मीद है कि कलेक्टर की यह कार्यशैली शुरुआती दौर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि राजस्व, स्वास्थ्य, नगर पालिका, शिक्षा सहित सभी विभागों में जवाबदेही और समयबद्ध कार्यप्रणाली सुनिश्चित होगी।
फिलहाल रायसेन में कलेक्टर की सक्रियता चर्चा का विषय बनी हुई है। सरकारी दफ्तरों में बढ़ी हलचल और अधिकारियों की कार्यशैली में आए बदलाव से आम नागरिकों को उम्मीद है कि अब उनकी समस्याओं का समाधान तेज़ी और प्राथमिकता के साथ होगा।

