शेखावाटी में जिला परिषद चुनाव में भाजपा ने भी मुस्लिम उम्मीदवारों पर जताया भरोसा, सीकर से जरीना और झूंझुनू से जमीला को दिया टिकट | New India Times

अशफ़ाक़ क़ायमखानी, ब्यूरो चीफ, जयपुर (राजस्थान), NIT:

शेखावाटी में जिला परिषद चुनाव में भाजपा ने भी मुस्लिम उम्मीदवारों पर जताया भरोसा, सीकर से जरीना और झूंझुनू से जमीला को दिया टिकट | New India Times

राजस्थान के शेखावाटी अंचल में, जहां मुस्लिम मतदाताओं में कायमखानी बिरादरी की अच्छी खासी भागीदारी है, वहां जिला परिषद चुनावों में कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा भी मुस्लिम उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारती रही है। अब तक हुए जिला परिषद चुनावों में दोनों ही प्रमुख दलों के टिकट पर मुस्लिम प्रत्याशी जीतकर सदस्य बनते रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस ने अब तक किसी मुस्लिम सदस्य को जिला प्रमुख या उप जिला प्रमुख की जिम्मेदारी नहीं सौंपी है। इसके विपरीत, भाजपा ने वर्ष 2010 से 2015 के कार्यकाल में चूरू जिला परिषद से पार्टी की टिकट पर निर्वाचित रफीक खान को उप जिला प्रमुख बनाया था।
राजस्थान में पंचायत चुनाव-2026 की प्रक्रिया जारी है। इस बार सीकर और झूंझुनू जिला परिषद सदस्य के चुनाव में भाजपा ने भी मुस्लिम उम्मीदवारों को मौका दिया है। भाजपा ने सीकर जिला परिषद के वार्ड संख्या 47 से जरीना खान तथा झूंझुनू जिला परिषद के वार्ड संख्या 1 से जमीला खान को उम्मीदवार बनाया है। दोनों का मुकाबला कांग्रेस के मुस्लिम प्रत्याशियों से है।

शेखावाटी अंचल के तीसरे जिले चूरू में इस बार भाजपा और कांग्रेस, दोनों ने ही जिला परिषद सदस्य के लिए किसी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया है। वहीं, कांग्रेस ने सीकर से एक और झूंझुनू से दो मुस्लिम प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। भाजपा ने भी सीकर और झूंझुनू से एक-एक मुस्लिम महिला उम्मीदवार को टिकट दिया है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इसी रविवार को जयपुर स्थित अपने सरकारी आवास पर कायमखानी बिरादरी के प्रमुख महिला-पुरुषों के साथ जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किया था। वर्ष 2010-2015 के कार्यकाल में भाजपा की ओर से चूरू के उप जिला प्रमुख रहे रफीक खान तथा वर्तमान चुनाव में भाजपा की प्रत्याशी जरीना खान और जमीला खान, तीनों का संबंध कायमखानी बिरादरी से है।
अब आगामी 14 नवंबर को होने वाले मतदान में दोनों भाजपा प्रत्याशियों का राजनीतिक भविष्य मतपेटियों में बंद हो जाएगा। इसके बाद मतगणना के परिणाम तय करेंगे कि मतदाताओं का समर्थन किसे मिलता है। साथ ही यह भी देखना दिलचस्प होगा कि यदि दोनों प्रत्याशी चुनाव जीतती हैं तो पार्टी उन्हें संगठन और जिला परिषद में कितनी अहमियत देती है।

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