त्रिवेंद्र जाट , देवरी-सागर (मप्र), NIT:
रक्षाबंधन के पावन पर्व पर भाई-बहन के प्रेम और विश्वास के साथ सामाजिक सरोकार का संदेश भी सामने आया। भाइयों ने अपनी बहनों को वचन दिया कि वे किसी भी प्रकार के नशे का सेवन नहीं करेंगे और अपने साथियों तथा समाज के अन्य लोगों को भी नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करेंगे।
भाइयों ने संकल्प लिया कि “बहन की राखी का मान रखेंगे, नशे को अपने जीवन से दूर रखेंगे।” उन्होंने कहा कि राखी केवल भाई की कलाई पर बंधा धागा नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी का प्रतीक है। ऐसे में इस पवित्र बंधन के साथ नशामुक्त जीवन जीने का संकल्प लेना भी जरूरी है।
“नशा नहीं करना है, नशा नहीं करने देना है” के संदेश के साथ भाइयों ने समाज में नशामुक्ति की अलख जगाने का संकल्प लिया। उनका कहना है कि एक भाई का नशामुक्त होना केवल उसका व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि पूरे परिवार की खुशियों, स्वास्थ्य और बेहतर भविष्य की रक्षा से जुड़ा संकल्प है।
रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति का ऐसा पावन पर्व है, जो भाई-बहन के प्रेम, विश्वास, सम्मान और सुरक्षा के बंधन को मजबूत करता है। श्रावण मास की पूर्णिमा के अवसर पर बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके सुख, समृद्धि और दीर्घायु की कामना की, वहीं भाइयों ने भी बहनों की रक्षा और हर परिस्थिति में उनका साथ निभाने का वचन दिया।
आज के बदलते समय में रक्षाबंधन का संदेश परिवार की सीमाओं से आगे बढ़कर सामाजिक जिम्मेदारी से भी जुड़ रहा है। नशे जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ सामूहिक संकल्प इसी दिशा में एक सार्थक पहल है।
आनंद दीक्षित, देवरी ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं, बल्कि एक-दूसरे के बेहतर भविष्य की जिम्मेदारी निभाने का भी अवसर है। यदि हर भाई अपनी बहन की राखी का मान रखते हुए नशे से दूर रहने का संकल्प ले और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करे, तो निश्चित रूप से स्वस्थ, सुरक्षित और नशामुक्त समाज के निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा सकता है।
संदेश स्पष्ट है—राखी का मान, नशे से इनकार; परिवार की खुशियों के लिए नशामुक्त जीवन का संकल्प।

